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श्यामपुर, खंडवा | सोमवार, मार्च 23, 2026
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में लोक संस्कृति और आस्था का महापर्व गणगौर उत्सव परंपरागत हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। श्यामपुर में आयोजित इस तीन दिवसीय भव्य मेले में न केवल खंडवा बल्कि आसपास के दर्जनों गांवों से सैकड़ों ग्रामीण पहुंचे। ढोल-ताशों की गूँज और लोकगीतों के बीच पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो गया।
वर्षों पुरानी ‘रूठने और मनाने’ की अनोखी परंपरा
इस उत्सव का सबसे आकर्षण केंद्र वह सदियों पुरानी परंपरा रही, जिसमें माता गणगौर (पार्वती जी) प्रतीक रूप में गांव से ‘रूठकर’ बाहर भाग जाती हैं। इसके बाद गांव की महिलाएं कई किलोमीटर तक उनका पीछा करती हैं और उन्हें मनाने का जतन करती हैं। लंबी दूरी तय करने और मान-मनुहार के बाद जब माता मानती हैं, तब उन्हें ससम्मान वापस गांव लाया जाता है। इस अद्भुत दृश्य को देखने के लिए दूर-दराज से बड़ी संख्या में जनसैलाब उमड़ा।
भव्य शोभायात्रा और विशेष श्रृंगार
उत्सव की शुरुआत ग्राम के ताखाजी देव स्थान से एक भव्य शोभायात्रा के साथ हुई।
- जीवंत स्वरूप: शोभायात्रा में दो महिलाएं माता पार्वती और दो महिलाएं भगवान भोलेनाथ के स्वरूप में सुसज्जित थीं।
- महिला शक्ति: विशेष बात यह रही कि गणगौर को मनाने की इस पूरी परंपरा की कमान केवल महिलाओं के हाथ में रहती है। महिलाएं सिर पर गणगौर और गणगौरिया धारण कर गांव के प्रमुख मार्गों से निकलीं, जहां जगह-जगह उनका भव्य स्वागत किया गया।
क्या कहते हैं ग्रामीण और जिम्मेदार?
ग्राम सरपंच लीलाकिशन मुकाती और ग्रामीण देवकरण वर्मा ने बताया कि यह परंपरा सैकड़ों वर्षों से चली आ रही है। आज की पीढ़ी भी इसे पूरे श्रद्धा और उत्साह के साथ निभा रही है।
“यह बहुत पुरानी परंपरा है। भगवान शंकर और माता पार्वती जोड़े से निकलते हैं। इस उत्सव के लिए दूर-दूर से मेहमान और श्रद्धालु पधारते हैं।”
प्रशासनिक और पंचायत की व्यवस्थाएं
तीन दिवसीय मेले के सफल संचालन के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए थे:
- सुरक्षा: श्यामपुर पुलिस द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम रहे ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।
- सुविधाएं: ग्राम पंचायत द्वारा मेला परिसर की साफ-सफाई, शुद्ध पेयजल और प्रकाश (लाइट) की समुचित व्यवस्था की गई।




