अलर्ट! अशोकनगर कलेक्ट्रेट में भूकम्प आपदा पर भव्य मॉक ड्रिल

0
244

Drnewsindia.com

अशोकनगर / कलेक्ट्रेट परिसर गुरुवार को एक वास्तविक आपदा क्षेत्र में बदल गया, जहाँ उत्तर प्रदेश के लखनऊ से आई 11वीं वाहिनी राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीम ने भूकम्प आपदा पर आधारित एक विशाल मॉक ड्रिल का आयोजन किया। कलेक्टर आदित्य सिंह की उपस्थिति में, इस अभ्यास ने आपदा के दौरान फंसे लोगों को बचाने की तैयारी को परखा।

कंट्रोल रूम से शुरू हुआ ऑपरेशन ‘लाइफलाइन’

मॉक ड्रिल की शुरुआत नियंत्रण कक्ष (Control Room) को एक जर्जर मकान गिरने की सूचना मिलने के साथ हुई। सूचना मिलते ही अलार्म बजा और NDRF की प्रशिक्षित टीम तत्काल सक्रिय हो गई। टीम ने तुरंत जर्जर बिल्डिंग के प्रतीकात्मक मलबे में फंसे लोगों को बचाने का अभियान शुरू किया।

तकनीक और रणनीति का प्रदर्शन

बचाव दल ने मलबे में दबे लोगों की तलाश शुरू की। इस दौरान एक महत्वपूर्ण घोषणा की गई: “यदि कोई व्यक्ति मलबे में फंसा है, तो वह पत्थर खटखटाकर अपनी उपस्थिति बता सकता है, जिससे बचाव दल उसके स्थान को चिह्नित कर सके।”

चूँकि प्रतीकात्मक मकान के मलबे के अंदर जाने का कोई सीधा रास्ता नहीं था, टीम ने अत्याधुनिक तकनीकों का प्रयोग किया:

  1. प्रवेश द्वार निर्माण: टीम ने दीवारों में सावधानीपूर्वक तीन छेद (हॉल) बनाए, यह सुनिश्चित करते हुए कि अंदर फंसे किसी व्यक्ति को चोट न पहुंचे।
  2. स्थिति का आकलन: कैमरा से लैस मशीन (बचाव एवं तलाश उपकरण) का उपयोग किया गया ताकि अंदर फंसे लोगों की स्थिति का पता लगाया जा सके।
  3. पहचान और कटिंग: मशीन की स्क्रीन पर देखकर और फंसे लोगों की आवाज सुनकर उनकी पहचान की गई, जिसके बाद ड्रिल की मदद से कटिंग प्रक्रिया शुरू हुई।

हाइलाइट: मलबे में फंसे लोगों को खटखटाकर अपनी उपस्थिति बताने की घोषणा आपदा के दौरान संचार की महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाती है।

सफल रेस्क्यू और आपातकालीन उपचार

बचाव दल ने कुशलतापूर्वक बिल्डिंग के अंदर फंसे व्यक्तियों को बाहर निकाला। उन्हें तत्काल स्ट्रेचर पर रखकर अस्पताल भेज दिया गया। गंभीर रूप से घायल व्यक्तियों को ऑक्सीजन लगाकर एम्बुलेंस के माध्यम से अस्पताल पहुंचाया गया।

इसके अलावा, अभ्यास में अन्य जटिल स्थितियों से निपटने का भी प्रदर्शन किया गया:

  • अग्निशमन: अभ्यास के दौरान आग लगने की स्थिति से निपटने का प्रदर्शन किया गया, जिस पर फायर ब्रिगेड ने त्वरित कार्रवाई कर काबू पाया।
  • ऊंचाई से बचाव: तीसरी मंजिल पर फंसे एक व्यक्ति को रस्सी (Rope Rescue) की सहायता से सुरक्षित निकाला गया।
  • संवेदनशील बचाव: मलबे में फंसे एक बच्चे को एक महिला कर्मी ने सुरक्षित बाहर निकाला।

अभ्यास का समापन यह सुनिश्चित करने के साथ हुआ कि अब मलबे में कोई अन्य व्यक्ति फंसा नहीं है। यह मॉक ड्रिल आपदा से निपटने के लिए NDRF और स्थानीय प्रशासन की उच्चस्तरीय तैयारी को दर्शाती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here