अशोकनगर: ‘मैसेज आया पर सिलेंडर नहीं’, उपभोक्ताओं का फूटा गुस्सा; कलेक्ट्रेट गेट पर खाली टंकी रख किया प्रदर्शन

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अशोकनगर। जिले में सोमवार को गैस सिलेंडर की किल्लत और वितरण में धांधली को लेकर उपभोक्ताओं का जबरदस्त आक्रोश देखने को मिला। दो अलग-अलग गैस एजेंसियों के सैकड़ों उपभोक्ताओं ने पहले सड़कों पर जाम लगाया और फिर अपनी मांगों को लेकर कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव किया। मामला मोबाइल पर सिलेंडर डिलीवरी का फर्जी मैसेज आने से जुड़ा है।

🚫 सड़क पर ‘जय बाबा गैस एजेंसी’ के उपभोक्ता

सुबह की शुरुआत हंगामे के साथ हुई जब कोलूआ रोड स्थित जय बाबा इंडियन गैस एजेंसी के बाहर भीड़ जमा हो गई।

  • विवाद की वजह: उपभोक्ताओं का आरोप है कि उनके मोबाइल पर ‘सिलेंडर डिलीवर’ होने का मैसेज आ चुका है, लेकिन असल में उन्हें टंकी मिली ही नहीं।
  • चक्काजाम: एजेंसी से संतोषजनक जवाब न मिलने पर नाराज लोगों ने सड़क पर बैठकर चक्काजाम कर दिया। सूचना मिलते ही देहात थाना पुलिस मौके पर पहुँची और समझाइश देकर जाम खुलवाया।

🏛️ कलेक्ट्रेट गेट पर ‘खाली सिलेंडर’ का प्रदर्शन

कोलूआ रोड के बाद हंगामा कलेक्ट्रेट कार्यालय तक जा पहुँचा। यहाँ गुना रोड स्थित डीसी गैस गोदाम के उपभोक्ता बड़ी संख्या में खाली सिलेंडर लेकर पहुँच गए।

  1. प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट पर ही अपने खाली सिलेंडर रख दिए और जमकर नारेबाजी की।
  2. उपभोक्ताओं का कहना है कि महीनों पहले बुकिंग कराने के बावजूद उन्हें गैस नहीं मिल रही है, जबकि सिस्टम में उन्हें ‘डिलीवरी’ दिखाई जा रही है।

🗣️ “एक महीने से काट रहे चक्कर” – उपभोक्ताओं का दर्द

दुर्गा कॉलोनी निवासी प्राण सिंह कुशवाह ने अपनी आपबीती सुनाते हुए कहा:

“मैंने एक महीने पहले डीसी गैस गोदाम पर सिलेंडर बुक किया था। मोबाइल पर मैसेज आ गया कि टंकी मिल गई है, लेकिन घर पर कोई नहीं आया। अब जब दोबारा बुक करने की कोशिश कर रहा हूँ, तो नंबर ही नहीं लग रहा।”

अन्य उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि एजेंसियां यह कहकर टाल देती हैं कि रिक्शा के जरिए घर पहुँच जाएगा, लेकिन वह सिलेंडर रास्ते में ही गायब हो जाते हैं या चहेतों को दे दिए जाते हैं।


⚠️ प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती

वर्तमान में उपभोक्ताओं ने कलेक्ट्रेट में अपनी शिकायत दर्ज कराई है। जनता की मांग है कि:

  • डिजिटल मैसेज और फिजिकल डिलीवरी के बीच के इस ‘घोटाले’ की जांच हो।
  • होम डिलीवरी व्यवस्था को पारदर्शी बनाया जाए।
  • लापरवाही बरतने वाली एजेंसियों के लाइसेंस रद्द किए जाएं।

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