त्योहारों की रौनक जब जेल की ऊंची दीवारों के भीतर पहुंचती है, तो माहौल भावुक हो जाता है। कुछ ऐसा ही नजारा गुरुवार को अशोकनगर जिला जेल में देखने को मिला, जहां भाई दूज के अवसर पर भाई-बहन के अटूट प्रेम की गूंज सुनाई दी। जेल प्रशासन की विशेष पहल पर बहनों ने सलाखों के पीछे बंद अपने भाइयों को तिलक लगाकर उनकी लंबी उम्र की कामना की।
📸 भावुक मुलाकात: जब बरसों बाद मिले भाई-बहन
सुबह से ही जेल के बाहर बहनों की लंबी कतारें लग गई थीं। आधार कार्ड और अन्य दस्तावेजों के सत्यापन के बाद जैसे ही बहनों को अंदर प्रवेश मिला, माहौल काफी भावुक हो गया।
छलकी आंखें: लंबे समय बाद एक-दूसरे को सामने देखकर कई भाई और बहनों की आंखें भर आईं।
तिलक और मिठाई: बहनों ने परंपरा के अनुसार भाइयों का तिलक किया और उन्हें अपने हाथों से मिठाई खिलाई।
⚖️ सुरक्षा के बीच स्नेह: जेल प्रशासन के कड़े नियम
त्योहार की खुशी के साथ-साथ जेलर ललित दीक्षित ने सुरक्षा व्यवस्था का भी पूरा ध्यान रखा। मुलाकात के लिए कुछ खास नियम तय किए गए थे:
मुलाकात का समय: प्रत्येक बंदी को परिजनों से मिलने के लिए 10 मिनट का समय दिया गया।
परिजनों की संख्या: एक बंदी से अधिकतम 3 परिजन (और 6 साल तक के बच्चे) ही मिल सके।
चेकिंग: बहनों को केवल मिठाई ले जाने की अनुमति थी, जिसकी गहन जांच की गई।
🎭 तनाव मुक्त करने की पहल: होली के बाद भाई दूज
जेल प्रशासन बंदियों के मानसिक स्वास्थ्य और सुधार पर विशेष ध्यान दे रहा है।
होली का जश्न: भाई दूज से एक दिन पहले जेल परिसर में सभी 206 बंदियों (200 पुरुष और 6 महिलाएं) ने उत्साह के साथ होली खेली।
सुधार की दिशा: जेलर ललित दीक्षित के अनुसार, ऐसे आयोजनों से बंदियों का मानसिक तनाव कम होता है और उनमें सकारात्मक बदलाव आता है।
“हमारा प्रयास है कि बंदी समाज की मुख्यधारा से कटे हुए महसूस न करें। भाई दूज जैसे पर्व उन्हें परिवार की जिम्मेदारी और सुधार की प्रेरणा देते हैं।” > — ललित दीक्षित, जेलर, जिला जेल अशोकनगर
📊 जिला जेल अशोकनगर: एक नजर में
कुल बंदी: 206
पुरुष कैदी: 200
महिला कैदी: 06
विशेष आयोजन: होली मिलन और भाई दूज मुलाकात।
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