आत्माराम पारदी हत्याकांड: 9 साल बाद मुख्य आरोपी बर्खास्त SI रामवीर की फॉर्मल गिरफ्तारी, सुप्रीम कोर्ट से जमानत रद्द होते ही बढ़ा शिकंजा

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गुना: मध्य प्रदेश के चर्चित आत्माराम पारदी हत्याकांड में न्याय की उम्मीद एक बार फिर जागी है। मामले के मुख्य आरोपी और बर्खास्त सब-इंस्पेक्टर (SI) रामवीर कुशवाह को बुधवार को भारी सुरक्षा के बीच रीवा सेंट्रल जेल से गुना जिला कोर्ट लाया गया। यहाँ CID ने हत्याकांड के मामले में उसकी फॉर्मल गिरफ्तारी दर्ज की और कोर्ट ने उसे रिमांड पर भेज दिया है।

क्या है 2015 का आत्माराम पारदी कांड?

यह मामला साल 2015 का है, जब आत्माराम पारदी अपनी मौसी के अस्थि विसर्जन के लिए पार्वती नदी गया था।

  • संदेहास्पद गायब: पुलिस की मौजूदगी में आत्माराम संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हो गया।
  • परिजनों के आरोप: परिवार ने आरोप लगाया कि SI रामवीर कुशवाह ने आत्माराम की गोली मारकर हत्या की और साक्ष्य मिटाने के लिए शव को गायब कर दिया।
  • CID की पुष्टि: साल 2022 में लंबी जांच के बाद CID ने माना कि आत्माराम की हत्या हुई थी। इसके बाद रामवीर सहित अन्य पुलिसकर्मियों पर केस दर्ज हुआ और रामवीर को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया।

⚖️ कानूनी दांवपेंच: हाई कोर्ट से राहत, सुप्रीम कोर्ट से झटका

फरारी के दौरान रामवीर पर 50 हजार रुपए का इनाम घोषित किया गया और कुर्की के नोटिस भी जारी हुए।

  1. जुलाई 2025: जिला कोर्ट ने अग्रिम जमानत खारिज की।
  2. ग्वालियर हाई कोर्ट: हाई कोर्ट से उसे ₹1 लाख के मुचलके पर अग्रिम जमानत मिल गई।
  3. सुप्रीम कोर्ट: आत्माराम की भाभी ने हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिसके बाद शीर्ष अदालत ने उसकी जमानत निरस्त कर दी।

स्वागत से जेल तक का सफर

हाई कोर्ट से जमानत मिलने के बाद जब रामवीर गुना पहुंचा, तो समर्थकों ने उसका फूल-मालाओं से स्वागत किया था। लेकिन यह खुशी ज्यादा दिन नहीं टिकी:

  • पुराने केस खुले: स्वागत के तुरंत बाद पुलिस ने धोखाधड़ी के पुराने मामले खोल दिए और उसे गिरफ्तार कर लिया।
  • जेल शिफ्टिंग: सुरक्षा कारणों और साक्ष्यों को प्रभावित करने की आशंका के चलते उसे गुना से चांचौड़ा और फिर रीवा सेंट्रल जेल शिफ्ट किया गया था।

अब आगे क्या?

बुधवार को कोर्ट में पेशी के बाद CID ने रामवीर को रिमांड पर लिया है। फिलहाल उसे विजयपुर थाने में रखा गया है।

जांच का केंद्र: CID अब रामवीर से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि आत्माराम का शव कहाँ है और इस पूरी साजिश में और कौन-कौन शामिल था।


मामले के अन्य अपडेट्स

  • योगेंद्र सिसोदिया (आरक्षक): 2 साल से जेल में बंद है, जिसे सरकारी गवाह बनाने का आश्वासन मिला है।
  • दिनेश गुर्जर (आरोपी): गिरफ्तारी के बाद वर्तमान में जमानत पर बाहर है।

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