आष्टा का ‘ईलाही माता धाम’: 2500 साल पुराना शक्तिपीठ, जहाँ खुदाई में मिली थीं वैष्णो देवी जैसी मूर्तियाँ

0
3

drnewsindia.com

आष्टा/भंवरा | 23 मार्च, 2026 चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर आष्टा जिले के ग्राम भंवरा स्थित ईलाही माता मंदिर में श्रद्धा का सैलाब उमड़ रहा है। करीब ढाई हजार साल पुराने इस प्राचीन शक्तिपीठ में दूर-दराज से श्रद्धालु पैदल और वाहनों के माध्यम से माता के दरबार में मत्था टेकने पहुँच रहे हैं।

🔱 शिव-शक्ति का अद्भुत संगम और अखंड ज्योत

ईलाही माता धाम को क्षेत्र के सबसे जाग्रत शक्तिपीठों में से एक माना जाता है। यहाँ माता की चमत्कारी प्रतिमा के साथ भगवान शिव का प्राचीन मंदिर भी स्थित है, जिसके कारण भक्त इसे ‘शिव शक्ति मंदिर’ के नाम से भी पूजते हैं। मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहाँ वर्षों से प्रज्ज्वलित अखंड ज्योत है, जो भक्तों की अटूट आस्था का प्रतीक है।

📜 इतिहास और रहस्य: राजा अजय पाल की तपस्या स्थली

मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण विक्रम संवत से भी लगभग 2500 वर्ष पूर्व हुआ था।

  • तांत्रिक साधना: कहा जाता है कि प्राचीन काल में राजा अजय पाल यहाँ तांत्रिक साधना और कठोर तपस्या के लिए आते थे।
  • चमत्कारी मूर्तियाँ: करीब 13 वर्ष पूर्व मंदिर परिसर में जीर्णोद्धार के दौरान खुदाई में एक ही पत्थर पर उकेरी गई वैष्णो देवी मंदिर जैसी प्राचीन मूर्तियाँ मिली थीं। इन दुर्लभ प्रतिमाओं को अब माता के मुख्य दरबार में ही स्थापित किया गया है।

🙏 मन्नतें और परंपराएँ

ईलाही माता के दरबार में मन्नत पूरी होने पर श्रद्धालु विशेष परंपराओं का पालन करते हैं:

  • जमाल चोटी और तुलादान: मन्नत पूरी होने पर जमाल चोटी उतारने और तुलादान करने की परंपरा यहाँ वर्षों से चली आ रही है।
  • महाआरती: नवमीं के दिन आयोजित होने वाली भव्य महाआरती में शामिल होने के लिए प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से हजारों श्रद्धालु पहुँचते हैं।

📍 कैसे पहुँचें ईलाही माता धाम?

यदि आप भी माता के दर्शन करना चाहते हैं, तो इन मार्गों का उपयोग कर सकते हैं:

  1. भोपाल-इंदौर हाईवे से: जताखेड़ा जोड़ (आष्टा) से मात्र 18 किमी की दूरी।
  2. आष्टा शहर से: सेमनरी रोड के माध्यम से 14 किमी का सफर।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here