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इंदौर के तलरेजा परिवार ने एक ही दिन में दो सदस्यों को खोने के गहरे दुख के बावजूद, चार लोगों के जीवन में उजाला करने का ऐतिहासिक निर्णय लिया।
1. घटना का विवरण: 12 घंटे में दो वियोग
परिवार पर दुखों का पहाड़ तब टूटा जब केवल 12 घंटे के अंतराल में घर की दो पीढ़ियों का निधन हो गया:
- मीरा देवी तलरेजा (84 वर्ष): लंबे समय से बीमार थीं, गुरुवार रात उन्होंने अंतिम सांस ली।
- लता तलरेजा (35 वर्ष): मीरा देवी की भतीजी, जिनकी शुक्रवार को अचानक कार्डियेक अरेस्ट से मृत्यु हो गई।
2. ‘परमार्थ’ का निर्णय: चार लोगों को मिलेगी दृष्टि
शोक संतप्त परिवार ने मुस्कान ग्रुप (जीतू बगानी और टीम) के सहयोग से दोनों दिवंगत सदस्यों के नेत्रदान की प्रक्रिया पूरी की। इस दान से:
- कुल 4 दृष्टिहीन व्यक्तियों के जीवन से अंधकार दूर होगा।
- समाज में अंगदान के प्रति एक सशक्त संदेश जाएगा।
3. नेत्रदान की वैज्ञानिक उपयोगिता
आई बैंक के आंकड़ों के अनुसार, नेत्रदान की सफलता दर और प्रक्रिया काफी सटीक होती है:
- सफलता दर: दान की गई आंखों में से 67% से 70% तक कॉर्निया प्रत्यारोपण (Transplant) के लिए पूरी तरह फिट होते हैं।
- सुरक्षा प्रोटोकॉल: संक्रमण रोकने के लिए हेपेटाइटिस (A, B, C) और HIV जैसी बीमारियों की गहन स्क्रीनिंग की जाती है।
- इंदौर का रिकॉर्ड: शहर में हर महीने औसतन 100 नेत्रदान होते हैं, जो इसे इस नेक काम में अग्रणी बनाता है।

निष्कर्ष: तलरेजा परिवार का यह कदम सिखाता है कि भीषण व्यक्तिगत क्षति के समय भी हम दूसरों के काम आ सकते हैं। यह न केवल उन चार लोगों के लिए वरदान है, बल्कि समाज के लिए एक प्रेरणास्पद उदाहरण भी है।




