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इंदौर। मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर में यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाने के लिए ट्रैफिक पुलिस ने ई-रिक्शा संचालकों के लिए सख्त नियम लागू कर दिए हैं। अब शहर में ई-रिक्शा अपनी मर्जी से कहीं भी नहीं घूम सकेंगे। पुलिस ने पूरे शहर को चार जोनों में बांट दिया है और प्रत्येक जोन के लिए एक विशेष कलर कोड (रंग) निर्धारित किया है।
15 अप्रैल है डेडलाइन: ‘पहले आओ-पहले पाओ’
डीसीपी (ट्रैफिक) राजेश कुमार त्रिपाठी ने स्पष्ट किया है कि ई-रिक्शा संचालकों को रजिस्ट्रेशन के लिए 15 अप्रैल 2026 तक का समय दिया गया है।
- सख्त कार्रवाई: यदि तय समय सीमा तक रजिस्ट्रेशन नहीं कराया गया, तो ट्रैफिक पुलिस न केवल चालान काटेगी, बल्कि ई-रिक्शा को जब्त करने की कार्रवाई भी करेगी।
- रजिस्ट्रेशन की स्थिति: शहर में अब तक लगभग 5,500 ई-रिक्शा का पंजीयन हो चुका है, जबकि अभी भी 3,000 से अधिक रिक्शाओं का रजिस्ट्रेशन होना बाकी है।

कलर कोडिंग से होगी जोनों की पहचान
ई-रिक्शा की छत का रंग देखकर अब पुलिस आसानी से पहचान सकेगी कि वह किस क्षेत्र का है। जोनों के हिसाब से रंगों का निर्धारण इस प्रकार है:
| जोन नंबर | निर्धारित रंग (छत के लिए) |
| जोन 1 | नीला (Blue) |
| जोन 2 | पीला (Yellow) |
| जोन 3 | लाल (Red) |
| जोन 4 | सफेद (White) |
कहाँ कराएं रजिस्ट्रेशन?
प्रशासन ने रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए दो अलग-अलग केंद्र बनाए हैं:
- जोन 1 और जोन 4: इन क्षेत्रों के ई-रिक्शा का पंजीयन ट्रैफिक थाना पश्चिम (महूनाका) में होगा।
- जोन 2 और जोन 3: इन क्षेत्रों के लिए पंजीयन ट्रैफिक थाना पूर्व (MTH कंपाउंड) में किया जाएगा।
क्यों लिया गया यह फैसला?
हाल ही में ट्रैफिक पुलिस अधिकारियों और ई-रिक्शा एसोसिएशन के बीच हुई बैठक में यह सहमति बनी थी। इस पहल का मुख्य उद्देश्य शहर के प्रमुख चौराहों पर लगने वाले जाम को कम करना और ई-रिक्शा के संचालन को व्यवस्थित करना है। अब ई-रिक्शा केवल अपने आवंटित जोन में ही सवारियाँ ढो सकेंगे।
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