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इंदौर | मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर का रियल एस्टेट बाजार, जो कभी अपनी रफ्तार के लिए जाना जाता था, अब ठंडा पड़ता दिख रहा है। स्टाम्प और पंजीयन विभाग के ताजा आंकड़े चौंकाने वाले हैं। इस साल संपत्ति की रजिस्ट्री (सेल डीड) में 10% की भारी गिरावट दर्ज की गई है, जिससे बाजार में करीब 4,000 करोड़ रुपये का लेनदेन कम हुआ है।
आंकड़ों की जुबानी: क्यों घट रहा है ग्राफ?
राजस्व विभाग के तुलनात्मक आंकड़े बताते हैं कि निवेशकों का रुझान प्रॉपर्टी से कम हुआ है:
- पिछले वर्ष: 78,500 रजिस्ट्रेशन (समान अवधि में)
- इस वर्ष: 68,700 रजिस्ट्रेशन
- कमी: लगभग 10,000 कम रजिस्ट्री
- राजस्व नुकसान: यदि ये 10,000 पंजीयन होते, तो सरकार को 400 करोड़ का अतिरिक्त राजस्व मिलता।
औसत कीमत में भी गिरावट
सीनियर रजिस्ट्रार अमरेश नायडू के अनुसार, पिछले वित्तीय वर्ष में प्रति रजिस्ट्रेशन औसत संपत्ति मूल्य 50 लाख रुपये था, जो इस साल घटकर 42 लाख रुपये रह गया है। इसका सीधा मतलब है कि अब लोग छोटे या कम कीमत वाले सौदों की ओर अधिक झुक रहे हैं।
बाजार ठंडा होने के 3 बड़े कारण
- आसमान छूती दरें: इंदौर में प्रॉपर्टी की कीमतें ₹5,000 से लेकर प्रीमियम इलाकों में ₹30,000 प्रति वर्गफीट तक जा पहुंची हैं।
- सोना-चांदी की चमक: रियल एस्टेट के मुकाबले निवेशकों को कीमती धातुओं (Gold & Silver) में बेहतर रिटर्न मिल रहा है।
- भारी टैक्स: स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क (10% से अधिक) होने के कारण खरीदार पीछे हट रहे हैं।
सावधान! अगले साल से और महंगी होगी जमीन (कलेक्टर गाइडलाइन)
भले ही बिक्री घटी है, लेकिन सरकार आगामी वित्तीय वर्ष के लिए कलेक्टर गाइडलाइन में बड़ी बढ़ोतरी की तैयारी कर रही है।
संशोधन का नया खाका:
- कुल स्थान: 4,800 लोकेशन्स का मूल्यांकन जारी।
- वृद्धि: 3,000 स्थानों पर दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव।
- दायरा: कीमतों में 10% से लेकर 200% तक की वृद्धि संभव।
- प्राइम लोकेशन: करीब 50 प्रमुख इलाकों में दरें 3 गुना (200%) तक बढ़ सकती हैं।
- नए क्षेत्र: सर्वे में 80 नए स्थानों को गाइडलाइन में जोड़ा जाएगा।
विशेषज्ञों की राय: बाजार में मंदी के बावजूद सरकारी दरों में इतनी बड़ी वृद्धि मध्यम वर्गीय खरीदारों के लिए घर खरीदना और भी मुश्किल बना सकती है।
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