drnewsindia.com
इंदौर | अगर आप भी सोशल मीडिया पर शेयर मार्केट और ट्रेडिंग के लुभावने विज्ञापन देखकर निवेश करने की सोच रहे हैं, तो सावधान हो जाइए। इंदौर के एरोड्रम क्षेत्र में एक व्यापारी से 65 लाख 57 हजार रुपए की बड़ी ठगी का मामला सामने आया है। ठगों ने बड़ी चालाकी से “Aditya Birla Capital” जैसे प्रतिष्ठित नाम का सहारा लेकर इस वारदात को अंजाम दिया।
🛑 कैसे बुना गया ठगी का जाल? (Step-by-Step)
- फेसबुक रील से शुरुआत: दिसंबर 2025 में पीड़ित दीपक चांदोरे ने फेसबुक पर एक ट्रेडिंग विज्ञापन देखा और लिंक पर क्लिक कर “A69 ABCL Wealth Navigator Club” नामक ग्रुप से जुड़ गए।
- एक महीने का ‘भरोसा’: ग्रुप में रोज मुनाफे के फर्जी स्क्रीनशॉट, वीडियो और ऑनलाइन लेक्चर डाले जाते थे। एक महीने तक यह सब देखने के बाद दीपक को लगा कि प्लेटफॉर्म असली है।
- ‘दीया मेहरा’ की एंट्री: वॉट्सऐप पर दीया मेहरा नाम की युवती ने संपर्क किया। उसने प्ले स्टोर से एक फर्जी ऐप डाउनलोड कराया और अकाउंट खुलवाकर भरोसा जीतने के लिए शुरू में सिर्फ ₹5,000 निवेश करवाए।
💸 ₹4 करोड़ का ‘लालच’ और ₹65 लाख की चपत
ठगों ने पीड़ित को मानसिक रूप से अपने जाल में ऐसे फंसाया:
- फर्जी प्रॉफिट: ऐप पर दीपक को दिखाया गया कि उनके निवेश पर ₹4 करोड़ का मुनाफा हो चुका है।
- IPO का झांसा: जब दीपक ने पैसे निकालने चाहे, तो तकनीकी दिक्कत बताकर उन्हें नए IPO में निवेश करने के लिए दबाव डाला गया।
- कुल चपत: 29 जनवरी से 20 फरवरी 2026 के बीच पीड़ित ने अलग-अलग किस्तों में कुल 65,57,000 रुपए ट्रांसफर कर दिए।
⚖️ पुलिस कार्रवाई: 4 मोबाइल नंबरों पर FIR
जब ऐप से पैसे विड्रॉ (Withdraw) नहीं हुए, तब दीपक को ठगी का अहसास हुआ। उन्होंने तुरंत साइबर सेल में शिकायत की।
- एरोड्रम पुलिस ने सोमवार को मामले में FIR दर्ज की है।
- जांच के घेरे में 4 मोबाइल नंबर और वे बैंक अकाउंट्स हैं जिनमें रकम ट्रांसफर की गई थी।
💡 साइबर एक्सपर्ट की सलाह: इन 3 बातों का रखें ध्यान
- अनजान ग्रुप्स से बचें: वॉट्सऐप या टेलीग्राम के उन ग्रुप्स पर कभी भरोसा न करें जो रातों-रात पैसा डबल करने का दावा करते हैं।
- ऐप की जांच: केवल SEBI रजिस्टर्ड ब्रोकर्स (जैसे Zerodha, Upstox, Angel One आदि) के जरिए ही निवेश करें। किसी के कहने पर रैंडम लिंक से ऐप डाउनलोड न करें।
- नाम का दुरुपयोग: ठग अक्सर नामी कंपनियों (जैसे Aditya Birla, Tata, Reliance) के नाम का इस्तेमाल कर फर्जी वेबसाइट बनाते हैं। हमेशा आधिकारिक वेबसाइट की स्पेलिंग चेक करें।




