इछावर: 70 सालों से जारी है ‘डांडी-भंवरा’ की अद्भुत परंपरा, खंभे पर झूलकर भगवान खंडराय को प्रसन्न करते हैं ग्रामीण

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बोरदीकलां (इछावर) | 05 मार्च, 2026

सीहोर जिले की इछावर तहसील का बोरदीकलां गांव इन दिनों अपनी एक दुर्लभ और प्राचीन परंपरा को लेकर चर्चा में है। यहाँ पिछले 7 दशकों (70 साल) से भगवान खंडराय के पूजन की एक ऐसी अनूठी रस्म निभाई जा रही है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग खिंचे चले आते हैं।

🚩 क्या है ‘डांडी-भंवरा’ की अनूठी परंपरा?

इस परंपरा के तहत गांव के बीचों-बीच एक विशाल और कई फीट ऊंचा खंभा लगाया जाता है। इसके ऊपरी हिस्से पर ‘डांडी-भंवरा’ (एक विशेष लकड़ी का ढांचा) बांधा जाता है।

  • हैरतअंगेज नजारा: ग्रामीण इस ढांचे पर चढ़ते हैं और फिर नीचे से रस्सियों के सहारे उन्हें हवा में गोल-गोल घुमाया जाता है।
  • श्रद्धा और विश्वास: ग्रामीणों की अटल मान्यता है कि इस कठिन अनुष्ठान को करने से भगवान खंडराय प्रसन्न होते हैं और गांव पर आने वाली सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।

🕰️ गाजीखेड़ी से शुरू हुआ था ये सफर

ग्रामीण अजय सिंह और लखन के अनुसार, इस परंपरा का इतिहास बेहद दिलचस्प है।

  1. इतिहास: करीब 70 साल पहले इस पूजा की शुरुआत पास ही के गांव गाजीखेड़ी में हुई थी।
  2. विरासत: पहले बोरदीकलां के लोग गाजीखेड़ी जाकर इस आयोजन में शामिल होते थे, लेकिन कालांतर में यह आयोजन बोरदीकलां में ही शुरू कर दिया गया, जो आज गांव की मुख्य पहचान बन चुका है।

📍 श्रद्धा का सैलाब: उमड़ती है भारी भीड़

यह वार्षिक आयोजन केवल बोरदीकलां तक सीमित नहीं रह गया है। भगवान खंडराय के प्रति आस्था ऐसी है कि आसपास के दर्जनों गांवों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहाँ पहुँचते हैं। पूरा गांव एक उत्सव के रंग में डूबा नजर आता है और युवा जोश के साथ इस साहसी परंपरा का निर्वहन करते हैं।

“हमारे पूर्वजों ने यह परंपरा शुरू की थी, और आज की युवा पीढ़ी भी उसी जोश के साथ इसे निभा रही है। यह हमारे गांव की एकता और संस्कृति का प्रतीक है।”ग्रामीण, बोरदीकलां


📊 परंपरा एक नजर में:

  • देवता: भगवान खंडराय।
  • प्रमुख रस्म: ऊंचे खंभे पर डांडी-भंवरा घुमाना।
  • अवधि: पिछले 70 वर्षों से निरंतर।
  • स्थान: बोरदीकलां, तहसील इछावर (सीहोर)।

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