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नई दिल्ली/नोएडा/गुरुग्राम / पवित्र रमजान माह के 30 रोजों के मुकम्मल होने के बाद आज राजधानी दिल्ली समेत पूरे NCR में ईद-उल-फितर का त्योहार पारंपरिक उत्साह और भाईचारे के साथ मनाया जा रहा है। जामा मस्जिद की सीढ़ियों से लेकर गुरुग्राम की ईदगाहों तक, हर तरफ खुशियों का मंजर दिखाई दिया।
1. जामा मस्जिद में नमाज और सुरक्षा के कड़े इंतजाम
सुबह की पहली किरण के साथ ही ऐतिहासिक जामा मस्जिद, फतेहपुरी मस्जिद और हजरत निजामुद्दीन दरगाह में हजारों अकीदतमंदों ने नमाज अदा की।
- हाई-टेक निगरानी: इस बार सुरक्षा के मद्देनजर दिल्ली पुलिस ने ड्रोन कैमरों और AI-आधारित निगरानी प्रणाली का उपयोग किया।
- फ्लैग मार्च: संवेदनशील इलाकों में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल के साथ फ्लैग मार्च निकाला गया।
2. दिग्गजों ने दी मुबारकबाद: ‘भारत की शांति मिसाल’
राजनीतिक हस्तियों ने भी मस्जिदों में पहुंचकर देश की तरक्की के लिए दुआ मांगी:
- शाहनवाज हुसैन (भाजपा नेता): पार्लियामेंट स्ट्रीट मस्जिद में नमाज के बाद उन्होंने कहा कि यह त्योहार आपसी मतभेद भुलाकर मिल-जुलकर रहने का प्रतीक है।
- यासिर जिलानी (भाजपा प्रवक्ता): उन्होंने भारत की सुरक्षा की सराहना करते हुए कहा कि जहाँ दुनिया के कई मुस्लिम देश युद्ध झेल रहे हैं, वहीं भारत में अमन और शांति है।
- मुख्तार अब्बास नकवी: उन्होंने भी मस्जिद पहुंचकर नमाज अदा की और देशवासियों को शुभकामनाएं दीं।

3. NCR का हाल: नोएडा और गुरुग्राम में जश्न
| शहर | स्थान | मुख्य गतिविधियाँ |
| नोएडा | सेक्टर-8 जामा मस्जिद | सुबह की नमाज के बाद गले मिलकर मुबारकबाद का सिलसिला। |
| गुरुग्राम | पटौदी ईदगाह | भारी संख्या में जुटे मुस्लिम समुदाय के लोगों ने देश की खुशहाली की दुआ की। |
| गाजियाबाद | स्थानीय मस्जिदें | बाजारों में रौनक और ईदी बांटने का दौर जारी। |

4. ‘मीठी ईद’ का सामाजिक संदेश
ईद-उल-फितर को ‘मीठी ईद’ भी कहा जाता है, क्योंकि आज हर घर में सेवइयाँ और लजीज पकवान बनते हैं।
- ईदी और खुशी: बच्चों में ईदी (पैसे और उपहार) को लेकर विशेष उत्साह देखा गया।
- जकात और फितरा: त्योहार का असली मकसद मानवता है। अकीदतमंदों ने गरीबों और बेसहारा लोगों को ‘फितरा’ देकर सुनिश्चित किया कि समाज का हर वर्ग इस खुशी में शामिल हो सके।
5. क्यों खास है यह तारीख?
इस्लामी कैलेंडर के अनुसार, शव्वाल महीने की पहली तारीख को ईद मनाई जाती है। यह चाँद के दीदार पर निर्भर करता है। 29 या 30 रोजों के बाद चाँद दिखने पर ही आधिकारिक घोषणा की जाती है, जो इस बार भारत में कल रात हुई।




