ईरान हिंसा: 538 की मौत, 10 हजार से ज्यादा गिरफ्तार; अमेरिका-इजराइल को धमकी – हमला हुआ तो पलटवार

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Drnewsindia

तेहरान। ईरान में 28 दिसंबर से शुरू हुए सरकार विरोधी प्रदर्शन 15 दिन बाद भी थमे नहीं हैं। हिंसक झड़पों में अब तक 538 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 10,600 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है। न्यूज एजेंसी AP के मुताबिक मरने वालों में 490 प्रदर्शनकारी और 48 सुरक्षाकर्मी शामिल हैं।

इसी बीच ईरान ने अमेरिका और इजराइल को कड़ी चेतावनी दी है। संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर कालीबाफ ने कहा कि अगर ईरान पर हमला हुआ तो अमेरिकी मिलिट्री बेस, जहाज और इजराइल सीधे निशाने पर होंगे।

संसद में ‘डेथ टू अमेरिका’ के नारे

ईरानी संसद के लाइव सत्र में सांसदों ने ‘डेथ टू अमेरिका’ के नारे लगाए। स्पीकर कालीबाफ ने सुरक्षा एजेंसियों की तारीफ करते हुए कहा कि हालात से सख्ती से निपटा गया है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को चेताया कि गिरफ्तार लोगों को कड़ी सजा दी जाएगी।

ट्रम्प को ईरान पर हमले के विकल्पों की ब्रीफिंग

अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अधिकारियों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को ईरान पर संभावित सैन्य कार्रवाई के विकल्पों की जानकारी दी है। न्यूयॉर्क टाइम्स के अनुसार, अगर ईरान सरकार प्रदर्शनकारियों पर ज्यादा सख्ती करती है तो अमेरिका सैन्य कदम पर विचार कर सकता है।

ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लिखा— “ईरान आजादी की ओर बढ़ रहा है, अमेरिका मदद के लिए तैयार है।”

राष्ट्रपति पजशकियान का आरोप: अमेरिका-इजराइल भड़का रहे दंगे

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा कि अमेरिका और इजराइल देश में अराजकता फैलाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की बात सुनेगी, लेकिन हिंसा फैलाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।

इजराइल हाई अलर्ट पर

ईरान पर संभावित अमेरिकी हमले की आशंका के चलते इजराइल हाई अलर्ट पर है। जून में ईरान और इजराइल के बीच 12 दिन की जंग हो चुकी है, जिसमें अमेरिका ने इजराइल का साथ दिया था। हाल ही में इजराइली पीएम नेतन्याहू और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के बीच फोन पर बातचीत भी हुई है।

ईरान के अटॉर्नी जनरल मोहम्मद मोवाहेदी आजाद ने कहा कि प्रदर्शन में शामिल लोगों को ‘खुदा का दुश्मन’ माना जाएगा, जिसकी सजा मौत हो सकती है। सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई ने भी कहा कि देश को तोड़ने की कोशिश करने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

ब्रिटेन की राजधानी लंदन में ईरानी दूतावास के बाहर प्रदर्शन हुआ। एक प्रदर्शनकारी ने इस्लामी गणराज्य का झंडा हटाकर 1979 से पहले वाला शेर-सूरज वाला झंडा फहरा दिया। पुलिस ने 3 लोगों को गिरफ्तार किया है।

रजा पहलवी की सड़कों पर उतरने की अपील

निर्वासित क्राउन प्रिंस रजा पहलवी ने लोगों से फिर सड़कों पर उतरने की अपील की है। उन्होंने दावा किया कि लगातार प्रदर्शनों से खामेनेई का दमनकारी तंत्र कमजोर पड़ रहा है। पहलवी ने कहा कि कई सुरक्षाकर्मी जनता पर कार्रवाई से इनकार कर रहे हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि वह देश लौटने की तैयारी कर रहे हैं और “राष्ट्रीय क्रांति की जीत के समय” जनता के साथ खड़े होंगे।

महंगाई और बेरोजगारी से भड़का गुस्सा

ईरान इस समय गंभीर आर्थिक संकट से गुजर रहा है।

  • रियाल गिरकर 1.45 मिलियन प्रति डॉलर तक पहुंच गया है।
  • खाद्य वस्तुएं 72% तक महंगी हुईं।
  • दवाइयों की कीमतों में 50% बढ़ोतरी।
  • 2026 बजट में 62% टैक्स बढ़ाने के प्रस्ताव से नाराजगी और बढ़ी।

तेल पर टिकी अर्थव्यवस्था

ईरान की अर्थव्यवस्था तेल निर्यात पर निर्भर है।

  • 2024 में निर्यात: 22.18 बिलियन डॉलर
  • आयात: 34.65 बिलियन डॉलर
  • व्यापार घाटा: 12.47 बिलियन डॉलर
    2025 में घाटा बढ़कर करीब 15 बिलियन डॉलर तक पहुंच गया है। जीडीपी ग्रोथ सिर्फ 0.3% रहने का अनुमान है।

1979 की इस्लामिक क्रांति के बाद से ईरान में धार्मिक शासन है। 37 साल से सुप्रीम लीडर अली खामेनेई सत्ता में हैं। बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी और सख्त धार्मिक कानूनों से नाराज लोग अब बदलाव चाहते हैं। इसी वजह से क्राउन प्रिंस रजा पहलवी को सत्ता सौंपने की मांग तेज हो रही है।

प्रदर्शनकारी उन्हें एक धर्मनिरपेक्ष और लोकतांत्रिक विकल्प मान रहे हैं, जो ईरान को स्थिरता और आजादी की ओर ले जा सकता है।

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