कांग्रेस में ‘हारने वाले’ ही बाजीगर! रीना बौरासी को महिला कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने पर उठे सवाल

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एक दशक का पैटर्न — चुनाव हारीं नेत्रियों को ही संगठन की बागडोर | प्रदेश में असंतोष बढ़ा

Drnewsindia.com/भोपाल। कांग्रेस में यह डायलॉग अब हकीकत जैसा लगता है —
“हार कर जीतने वाले को बाजीगर कहते हैं… लेकिन कांग्रेस में हारने वाले ही बाजीगर बन रहे हैं!”

प्रदेश महिला कांग्रेस में ताज़ा नियुक्ति ने यह फिर साबित कर दिया है। कांग्रेस ने इंदौर के सांवेर से 2023 विधानसभा चुनाव हार चुकी रीना बौरासी को प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष बना दिया है।

पार्टी की इस नियुक्ति के बाद सवाल उठ रहे हैं कि आखिर चुनाव जीतने का अनुभव न रखने वाली नेत्रियों को ही संगठन की कमान क्यों?


10 साल में कोई महिला अध्यक्ष चुनाव नहीं जीत सकी!

पार्टी के रिकॉर्ड में देखें तो—

  • पिछले दशक में एक भी महिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष विधायक नहीं बन सकी
  • न विधानसभा में जीत, न ही निकाय चुनावों में सफलता

फिर भी हर बार उन्हें ही महत्वपूर्ण पद सौंपे जाते रहे हैं।


‘दिल्ली की नियुक्ति’, लेकिन प्रदेश में नाराज़गी

सूत्रों के अनुसार—

  • नियुक्ति AICC महासचिव के.सी. वेणुगोपाल के आदेश पर हुई
  • लेकिन पर्दे के पीछे मध्य प्रदेश के कुछ प्रभावशाली नेताओं की भूमिका

कई वरिष्ठ कांग्रेसियों का मानना है कि—

“इस फैसले से दूसरे अंचलों की सक्रिय महिला नेताओं के साथ उपेक्षा हुई है।”

पार्टी में यह भी चर्चा है कि
कांग्रेस अब मालवा–निमाड़ केंद्रित होती जा रही है

जहाँ:

  • कुल 66 विधानसभा सीटें
  • 2023 में कांग्रेस सिर्फ 17 सीटें ही जीत पाई

हारने के बाद बढ़ा चार महिला नेताओं का कद

नेता का नामचुनाव/पदपरिणामबाद में मिला पद
विभा पटेल2013 गोविंदपुरापराजितमहिला कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष
अर्चना जायसवालनिगम चुनावपराजितदो बार प्रदेश अध्यक्ष
शोभा ओझा2008 इंदौर-5पराजितराष्ट्रीय/प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष
रीना बौरासी2023 सांवेरपराजितमौजूदा अध्यक्ष

यही कारण है कि पार्टी के भीतर सवाल गहराते जा रहे हैं।


युवा कांग्रेस में भी नई तैयारी: प्रदर्शन के बाद पदभार संभालेंगे यश घनघोरिया

युवा कांग्रेस के नए अध्यक्ष यश घनघोरिया पद संभालने से पहले शक्ति प्रदर्शन करेंगे।

  • 27 नवंबर — भोपाल में निर्वाचन आयोग का घेराव
    ✔ राष्ट्रीय अध्यक्ष व बड़े नेता भी मौजूद
  • 28 नवंबर — संभवतः पदभार ग्रहण
  • प्रदेशभर से युवा कांग्रेस कार्यकर्ता भोपाल जुटेंगे

प्रदर्शन खत्म होने के बाद:

  • विधायकों के साथ 1 दिसंबर से शुरू होने वाले विधानसभा सत्र की रणनीति पर चर्चा
  • अगले एक साल का रोडमैप तय करने बैठक

कांग्रेस के अंदर उठते सवाल

  • क्या कांग्रेस संगठन अनुभव के बजाय केवल निष्ठा को प्राथमिकता दे रही है?
  • क्या चुनाव जीतने वाले चेहरों का अभाव है?
  • या फिर गुटबाज़ी और शक्ति-संतुलन की मजबूरी?

अब देखना यह है कि
क्या सत्ता में वापसी के लिए कांग्रेस रणनीति बदलेगी या यही सिलसिला जारी रहेगा?


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