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जबलपुर। अखिल भारतीय किसान सभा की मध्यप्रदेश राज्य परिषद की बैठक हरिशंकर परसाई भवन, जबलपुर में संपन्न हुई। बैठक में किसानों, श्रमिकों और आम जनता के खिलाफ लाई जा रही नीतियों पर गंभीर चिंता जताई गई।
बैठक में निर्णय लिया गया कि सम्पूर्ण देश के साथ-साथ मध्यप्रदेश में भी संभागीय एवं उप-मंडल बिजली कार्यालयों के सामने तथा गांवों में विरोध प्रदर्शन कर प्रतियां जलाई जाएंगी।
मुख्य मांगें:
- बीज बाजार को निगमित करने के लिए लाया गया बीज विधेयक वापस लिया जाए।
- बिजली एक सार्वजनिक अधिकार है, बाजार की वस्तु नहीं।
- ये विधेयक राज्यों के संघीय अधिकारों पर सीधा हमला हैं।
26 जनवरी 2026 को हुए ट्रैक्टर मार्च के संदर्भ में, जो ऐतिहासिक किसान संघर्ष की पांचवीं वर्षगांठ का प्रतीक था, यह तय किया गया कि उसी दिन मजदूर संगठन संभागीय और उप-मंडल बिजली कार्यालयों तक विरोध मार्च निकालेंगे।
बीज विधेयक को छोटे किसानों के खिलाफ बताते हुए कहा गया कि यह बीजों पर मुट्ठीभर बड़ी कंपनियों का नियंत्रण स्थापित करने की कोशिश है। इससे किसानों के अधिकार कमजोर होंगे और बीजों की कीमतें मनमाने तरीके से तय की जा सकेंगी।
बीज विधेयक 2025 का मसौदा, पीपीवीएफआर अधिनियम 2001 और जैव विविधता से जुड़े अंतरराष्ट्रीय समझौतों की भावना के विपरीत है और यह कॉरपोरेट हितों को प्राथमिकता देता है।

संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने बिजली विधेयक 2025 के मसौदे का भी कड़ा विरोध किया। कहा गया कि यह बड़े पैमाने पर निजीकरण और केंद्रीकरण का रास्ता खोलता है, जिससे सार्वजनिक बिजली व्यवस्था कमजोर होगी और गरीब, ग्रामीण व किसान परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
क्रॉस-सब्सिडी खत्म होने से बिजली महंगी होगी, असमानता बढ़ेगी और किसान व श्रमिक वर्ग पर सीधा असर पड़ेगा। इसे जनविरोधी, किसान-विरोधी और श्रमिक-विरोधी कदम बताया गया।
बैठक में कहा गया कि जब देश में कृषि संकट गहराता जा रहा है, तब ऐसी कॉरपोरेट-समर्थक नीतियां हालात को और खराब करेंगी। इससे किसानों की सामाजिक-आर्थिक समस्याएं और बढ़ेंगी।
अखिल भारतीय किसान सभा के मध्यप्रदेश के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से विशेष रूप से आह्वान किया गया कि वे पूरे जोश के साथ आंदोलन में भाग लें और किसानों व श्रमिक संगठनों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर संघर्ष करें।
अध्यक्ष मंडल में उपस्थित साथी:
प्रहलाद दास बैरागी, गयाप्रसाद मिश्रा, जनक राठौर, राहुल भाई जी, राजकुमार शर्मा, अशोक शाह, अशोक पाठक सहित अन्य साथियों ने अपने विचार रखे।




