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सीहोर | केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) योजना का नाम बदलकर विकसित भारत गारंटी रोजगार आजीविका मिशन ग्रामीण (VB-G-RAM-G) किए जाने के फैसले का विरोध अब तेज हो गया है। इसी क्रम में राज्यसभा सांसद एवं मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह 5 जनवरी से सीहोर जिले की एक ग्राम पंचायत से पदयात्रा शुरू करेंगे।
यह पदयात्रा केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर से निकाली जाएगी, जिसे कांग्रेस द्वारा केंद्र सरकार के फैसले के खिलाफ एक बड़ा राजनीतिक संदेश माना जा रहा है।
ग्रामीण मजदूरों के हितों पर असर का आरोप
दिग्विजय सिंह ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा कानून में किए गए बदलावों से ग्रामीण श्रमिकों के अधिकार और हित प्रभावित होंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि योजना का नाम बदलकर सरकार राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अपमान कर रही है और उनके नाम को सार्वजनिक योजनाओं से हटाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि लोकसभा में मनरेगा से जुड़े बदलावों पर विधेयक पारित हो चुका है, जिसके बाद कांग्रेस ने इसका विरोध तेज कर दिया है। अब सीहोर से शुरू होने वाली यह पदयात्रा ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों को सरकार के फैसले के खिलाफ जागरूक करने का माध्यम बनेगी।
पदयात्रा के जरिए विरोध का ऐलान
दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट कहा—
“केंद्र सरकार ने मनरेगा कानून में जो बदलाव किए हैं, उनके विरोध में हम सीहोर जिले की एक ग्राम पंचायत से पदयात्रा निकालेंगे।”
कांग्रेस का दावा है कि यह पदयात्रा ग्रामीण भारत में रोजगार, अधिकार और संविधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए एक जनआंदोलन का रूप लेगी।




