Drnewsindia.com / 18 दिसंबर 2025
खंडवा / शहर में गुरुवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। पड़ावा क्षेत्र स्थित भैरव तालाब वार्ड में एक दो मंजिला इमारत अचानक ढह गई। महज कुछ ही सेकेंड में पूरी इमारत मलबे में तब्दील हो गई। इस भवन में शहर का नामी थोक मेडिकल स्टोर संचालित हो रहा था।
गनीमत यह रही कि गुरुवार को साप्ताहिक अवकाश होने के कारण स्टोर बंद था और कोई कर्मचारी मौजूद नहीं था, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई।
गहरी खुदाई से कमजोर हुई नींव
जानकारी के अनुसार, गिरने वाली इमारत के बिलकुल बगल में एक नई मार्केट का निर्माण कार्य चल रहा है। मार्केट के लिए गहरी खुदाई की जा रही थी, जिससे मेडिकल स्टोर की इमारत की नींव कमजोर हो गई। इसी कारण भवन अचानक धराशायी हो गया।

स्थानीय लोगों ने बताया कि खुदाई के कारण पहले से ही मकान में दरारें आ रही थीं, लेकिन गुरुवार को अचानक स्थिति गंभीर हो गई।
धूल का गुबार उठते ही अलर्ट हुए लोग
पड़ोसियों ने बताया कि इमारत गिरने से पहले अचानक धूल का तेज गुबार उठा, जिससे आसपास के लोग सतर्क हो गए। उसी समय मार्केट निर्माण स्थल पर काम कर रहे तीन मजदूरों को तुरंत वहां से हटाया गया।
कुछ ही देर बाद पूरी इमारत गिर गई। यदि मजदूर समय रहते बाहर नहीं निकलते तो बड़ा हादसा हो सकता था।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताई घटना की पूरी कहानी
प्रत्यक्षदर्शी शोएब ने बताया—
“साइट पर तीन लोग काम कर रहे थे। अचानक धुएं और धूल का गुबार उठा। मुझे लगा कि मकान गिर सकता है, इसलिए जोर से चिल्लाया। तीनों मजदूर बाहर निकल आए। करीब 15–20 मिनट बाद मकान पूरी तरह गिर गया।”

स्थानीय रहवासी दिलीप यादव ने कहा—
“इस दो मंजिला बिल्डिंग में सतपाल सिंह चावला का मेडिकल स्टोर चलता था। उनके बेटे मंजीत चावला भी यहीं बैठते हैं। आम दिनों में यहां 10 से 12 लोग रहते हैं और दोपहर बाद तो 20–25 लोगों की भीड़ रहती है।”
करोड़ों का नुकसान, मेडिकल स्टोर पूरी तरह तबाह
मकान मालिक सतपाल सिंह चावला के भतीजे अमृतपाल सिंह चावला ने बताया कि भवन की अनुमानित कीमत करीब एक करोड़ रुपए थी। मेडिकल स्टोर में रखा सामान, दवाइयां और अन्य संरचनाओं को मिलाकर करीब 5 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है।
हादसे के बाद पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल रहा और मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।
3 हजार स्क्वायर फीट में बन रहा कॉम्प्लेक्स
इमारत के पास निर्माण कार्य करा रहे खैराज लालवानी ने बताया कि करीब 3 हजार स्क्वायर फीट जमीन पर एक कॉम्प्लेक्स बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा—
“इंजीनियरों ने निर्देश दिए थे कि नींव की खुदाई तब तक की जाए, जब तक काली मिट्टी की सतह खत्म न हो जाए। खुदाई बेसमेंट के लिए नहीं, बल्कि नींव के लिए की जा रही थी।”
लालवानी ने यह भी दावा किया कि निर्माण से संबंधित सभी अनुमतियों के लिए नगर निगम में आवेदन ढाई महीने पहले ही कर दिया गया था। अधिकारी मौके का निरीक्षण भी कर चुके हैं, लेकिन परमिशन मिलने में देरी के कारण निर्माण कार्य औपचारिक रूप से शुरू नहीं किया गया था।
सिटी मजिस्ट्रेट बोले— जांच के बाद होगी कार्रवाई
घटना की जानकारी मिलते ही प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। सिटी मजिस्ट्रेट बजरंग बहादुर ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बिल्डिंग के पास चल रहे निर्माण कार्य और भैरव तालाब की नमी के कारण नींव कमजोर हुई।
उन्होंने कहा—
“भैरव तालाब पास होने के कारण आसपास की जमीन में 6–7 फीट पर ही पानी निकल आता है। नींव के लिए खोदे गए गड्ढे में भी तालाब का पानी भर गया था, जिससे मकान की नींव कमजोर हो गई।”
फिलहाल मलबा हटाने के निर्देश दिए गए हैं। भवन निर्माण और अनुमति से जुड़ा मामला नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में आता है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन की लापरवाही पर उठे सवाल
इस घटना के बाद नगर निगम और निर्माण कार्यों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निर्माण कार्यों की सख्त निगरानी और समय पर अनुमति प्रक्रिया सुनिश्चित की जाए।




