Drnewsindia / दिनांक: 4 जनवरी, 2026
नई दिल्ली/टेक डेस्क: साल 2026 अंतरिक्ष प्रेमियों और ज्योतिष में विश्वास रखने वालों के लिए बेहद रोमांचक होने वाला है। इस साल आसमान में कुल चार बड़े ग्रहण देखने को मिलेंगे। अद्भुत बात यह है कि जहाँ दुनिया ‘रिंग ऑफ फायर’ (सूर्य ग्रहण) की गवाह बनेगी, वहीं भारत में 2029 से पहले का आखिरी ‘पूर्ण चंद्र ग्रहण’ दिखाई देगा।
साल 2026 के ग्रहणों का कैलेंडर
| तारीख | ग्रहण का प्रकार | कहाँ दिखाई देगा? | भारत में स्थिति |
| 17 फरवरी 2026 | वलयाकार सूर्य ग्रहण | द. अफ्रीका, अर्जेंटीना, अंटार्कटिका | दृश्य नहीं |
| 03 मार्च 2026 | पूर्ण चंद्र ग्रहण | भारत, एशिया, अमेरिका | पूर्णतः दृश्य |
| 29 जुलाई 2026 | सूर्य ग्रहण | अफ्रीका, द. अमेरिका | दृश्य नहीं |
| अगस्त 2026 | आंशिक चंद्र ग्रहण | अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र | दृश्य नहीं |
3 मार्च 2026: भारत के लिए क्यों खास है यह ग्रहण?
साल का दूसरा ग्रहण (3 मार्च) भारत के लिए सबसे महत्वपूर्ण है।
- ब्लड मून (Blood Moon): इस दौरान चंद्रमा पूरी तरह पृथ्वी की छाया में छिप जाएगा और गहरे लाल रंग का नजर आएगा।
- अंतिम अवसर: खगोलविदों के अनुसार, यह 2029 से पहले होने वाला आखिरी पूर्ण चंद्र ग्रहण है।
- धार्मिक महत्व: चूंकि यह भारत में दिखाई देगा, इसलिए इसका सूतक काल मान्य होगा। मंदिर के कपाट बंद रहेंगे और पूजा-पाठ के विशेष नियम लागू होंगे।
☀️ 17 फरवरी 2026: ‘रिंग ऑफ फायर’ का नजारा
साल का पहला ग्रहण वलयाकार सूर्य ग्रहण होगा। इसमें चंद्रमा सूर्य के बीचों-बीच आकर उसे ढक लेगा, जिससे किनारे एक चमकती हुई अंगूठी की तरह दिखेंगे। इसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है। हालांकि, भारतीय इस अद्भुत नजारे को लाइव नहीं देख पाएंगे, लेकिन ऑनलाइन स्ट्रीमिंग के जरिए इसका आनंद लिया जा सकेगा।
सूतक काल और सावधानियां (Quick Facts)
- सूतक मान्य: केवल 3 मार्च के चंद्र ग्रहण का सूतक भारत में प्रभावी होगा।
- समय सीमा: सूर्य ग्रहण का सूतक 12 घंटे पहले और चंद्र ग्रहण का 9 घंटे पहले शुरू होता है।
- वैज्ञानिक दृष्टिकोण: ग्रहण एक शुद्ध खगोलीय घटना है, जो पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के एक सीधी रेखा में आने से होती है।
एडिटर की पसंद: क्या आप जानते हैं कि 3 मार्च को होने वाला पूर्ण चंद्र ग्रहण लगभग 58 मिनट तक चलेगा? अपनी दूरबीन साफ कर लें, क्योंकि ऐसा नजारा फिर अगले 3 सालों तक नहीं दिखेगा!




