Drnewsindia.com खजुराहो / टीकमगढ़, मध्य प्रदेश — खरीफ के बाद रबी सीजन भी किसानों के लिए ‘खाद की मारामारी’ बनकर रह गया है। घंटों की कतारों, चक्काजाम और काले बाजार के बीच किसानों की थकान और नाराजगी अब सार्वजनिक स्वास्थ्य और व्यवस्था का मामला बन चुकी है।
मध्य प्रदेश के कई जिलों में उर्वरक (यूरिया—डीएपी) की गंभीर कमी ने किसानों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी तहस-नहस कर दी है। टिकमगढ़ के बडौरा घाट वितरण केंद्र पर खाद के लिए लाइन में लगे 50 वर्षीय किसान जमुना कुशवाहा की शनिवार/सोमवार (सूचना के अनुसार) दोपहर में हार्ट अटैक से मौत हो गई — बताया गया कि वे सिर्फ दो बोरी यूरिया के लिए लगातार दौड़ रहे थे। मौत और चक्का-जाम के बावजूद किसानों को अब भी खाद नहीं मिल पा रही है, जबकि राज्य सरकार खजुराहो में कैबिनेट-बैठक कर रही थी।
एक नजर में
- टिकमगढ़ में जमुना कुशवाहा की कतार में हार्ट अटैक से मृत्यु; परिजनों का कहना — केवल दो बोरी यूरिया के लिए पिता तड़प रहे थे।
- बड़ामलहरा, लवकुशनगर, बमीठा, हरपालपुर आदि स्थानों पर किसानों ने राष्ट्रीय राजमार्ग और तहसील के सामने चक्का-जाम किया।
- कई जिलों — बड़वानी, खंडवा, शिवपुरी, बुरहानपुर, खरगोन, विदिशा, नर्मदापुरम में किसान रात से कतारों में; बुवाई प्रभावित।
- बाजार में डीएपी की काली बिक्री 1,900–2,000 रु. प्रति बोरी, यूरिया 500–600 रु. ब्लैक में बिक रहा है — किसानों की शिकायत।
- प्रशासनिक आंकड़ों के अनुसार कुछ डबल-लॉक केंद्रों में यूरिया उपलब्धता दर्ज है (छतरपूर/बमीठा/लवकुशनगर आदि) — फिर भी सप्लाई पर सवाल उठ रहे हैं।
- तहसीलदारों द्वारा महिलाओं से बदसलूकी का वीडियो विवाद में; संबंधित अधिकारियों पर नोटिस जारी किया गया — कार्रवाई अभी नहीं।
मौत ने खड़ी कर दी मानवतर तस्वीर
टिकमगढ़ के बडौरा घाट वितरण केंद्र पर लंबे समय से लाइन में लगे जमुना कुशवाहा (50) अचानक दोपहर को चक्कर खाने के बाद गिर पड़े। जिला अस्पताल ले जाने पर पोस्ट-मॉर्टम में हार्ट अटैक के संकेत मिले। उनके बेटे ने बताया कि पिता यूरिया की दो बोरी के लिए दिनभर भागते रहे — पर जब खाद नहीं मिली तो इंतजार में उनकी तबीयत बिगड़ गई। यह घटना किसानों की मेहनत व हक़ तक पहुँच में अंतर की कटु हकीकत उजागर करती है।
जब कैबिनेट बैठक और सड़क जाम एक साथ चलें
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव खजुराहो में अपनी कैबिनेट व अधिकारियों के साथ मौजूद थे, वहीं दूसरी तरफ खाद की कमी से आहत किसानों ने कई जगहों पर तेज प्रदर्शन कर के सड़कें जाम कर दीं। झांसी-खजुराहो नेशनल हाईवे और राष्ट्रीय राजमार्ग-76 पर किसानों ने यातायात रोका, प्रशासन ने समझाने का प्रयास किया पर गुस्सा कायम रहा। बुवाई का सीजन होने से किसानों का समय अनमोल है — समय पर खाद न मिलने पर फसल और आमदनी दोनों प्रभावित होंगे।
आपूर्ति है पर वितरण क्यों नहीं?
सरकार के अनुसार दोबारा लॉक-पद्वति (double-lock) वाले केंद्रों में पर्याप्त स्टॉक भेजा गया था — छतरपूर के डबल-लॉक केंद्र में 380 मीट्रिक टन, बमीठा 250, लवकुशनगर 250, बड़ामलहरा 200 टन यूरिया जैसे आंकड़े उपलब्ध कराए गए। बावजूद इसके स्थानीय स्तर पर किसानों को खाद नहीं मिल पाना वितरण व्यवस्था, आपूर्ति-श्रृंखला या स्थानीय ब्लैक-मार्केटिंग पर गंभीर सवाल खड़े करता है। कई किसानों ने बताया कि वे रातों रात मंडियों में सोकर भी अपना नंबर नहीं पाते।
प्रशासनिक विवाद और भरोसा कब लौटेगा?
कुछ जगहों पर अधिकारियों के अनैतिक व्यवहार के वीडियो और आरोप भी सामने आए हैं — सौरा मंडल की तहसीलदार ऋतु सिंघई का एक वीडियो वायरल हुआ, इसके बाद कलेक्टर पार्थ जायसवाल ने संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी किया। फिर भी प्रभावित इलाकों में किसी अधिकारी के खिलाफ ठोस कार्रवाई की खबर नहीं है — इससे किसानों का भरोसा और घटता जा रहा है।
क्या होना चाहिए — सुझाव
- तत्काल: संवेदनशील जिलों में आपातकालीन आपूर्ति-वैन/कंट्रोल रूम तैनात हों।
- पारदर्शिता: हर वितरण केंद्र पर ऑनलाइन स्टॉक और टोकन वितरण-लाइव अपडेट उपलब्ध कराना।
- काले बाजार रोकने के लिए सख्त निगरानी और कंट्रोल रूम से समन्वयित रेड।
- स्वास्थ्य निगरानी: लंबी कतारों के दौरान प्राथमिक चिकित्सा-यूनिट और पैनिक टेलीफोन उपलब्ध हों।
- दीर्घकालीन: उर्वरक आपूर्ति-श्रृंखला का रीव्यू और छोटे किसानों के लिये सब्सिडी/वाउचर आधारित वितरण मॉडल लागू करना।




