ग्रामीणों ने बूचड़खाना अनुमति के खिलाफ निकाली वाहन रैली, कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

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सीहोर / दोराहा तहसील के सैकड़ों ग्रामीणों ने ग्राम सतपोन में प्रस्तावित बूचड़खाना निर्माण की अनुमति के विरोध में मंगलवार को एक विशाल वाहन रैली निकालकर जिला मुख्यालय कलेक्ट्रेट पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। जनसुनवाई के दौरान दो पहिया व चार पहिया वाहनों की लंबी कतारों के साथ पहुंचे ग्रामीणों ने जमकर नारेबाजी की और प्रशासन से अनुमति निरस्त करने की मांग उठाई।कलेक्टर की अनुपस्थिति से नाराज़ हुए ग्रामीणरैली कलेक्ट्रेट पहुंची तो ज्ञापन लेने के लिए कलेक्टर की जगह एसडीएम आए। इसे लेकर ग्रामीण आक्रोशित हो गए और कलेक्टर को ही ज्ञापन सौंपने की जिद पर कलेक्ट्रेट परिसर में बैठ गए। काफी देर बाद अपर कलेक्टर के आने पर ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।ग्रामीणों का आरोप—फलों-सब्जियों के संरक्षण के नाम पर धोखा

ज्ञापन में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि ग्राम सतपोन की कृषि भूमि पर
एस.ए.जी. फूड्स एक्सपोर्ट प्राइवेट लिमिटेडज्ञद्वारा फल एवं सब्जियों के संरक्षण इकाई बताकर झूठे दस्तावेजों के आधार पर अनुमति ली गई, जबकि वास्तविक उद्देश्य बड़ा बूचड़खाना (कसाईखाना) स्थापित करना है।

ग्रामीणों ने बताया कि—

  • कंपनी ने 24 जनवरी 2025 को ग्राम पंचायत कतपोन से गलत जानकारी देकर अनापत्ति प्रमाणपत्र लिया।
  • उस दिन भूमि कंपनी के नाम पर दर्ज भी नहीं थी।
  • बाद में 07 मई 2025 को भूमि एस.ए.जी. फूड्स के नाम म्यूटेशन हुई।
  • ग्राम पंचायत कतपोन ने 03 अक्टूबर 2025 की सभा में पूर्व अनुमति को रद्द कर दिया।
  • ग्राम सतपोन की भूमि पर निर्माण हो रहा है, इसलिए नियमानुसार ग्राम सतपोन की ग्राम सभा की NOC अनिवार्य** है, जो कंपनी द्वारा नहीं ली गई।
    प्रदूषण और सुरक्षा का बड़ा खतरा—ग्रामीण**

ग्रामीणों का कहना है कि कंपनी की योजना प्रतिदिन—

  • 1000 भैंस,
  • 2000 बकरा-बकरी,
  • 1000 भेड़

की कटाई करने की है। इससे खून, चमड़ा, हड्डी और अवशेषों के कारण क्षेत्र में गंभीर प्रदूषण और बदबू फैलेगी।

उन्होंने यह भी आशंका जताई कि कंपनी में लगभग 600 कर्मचारियों की भर्ती होगी, जिनमें बाहरी राज्यों से आने वाले लोग होंगे, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा खतरा पैदा हो सकता है।

ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया को

  • ग्राम सतपोन में बूचड़खाना निर्माण की अनुमति तत्काल निरस्त की जाए।
  • झूठे दस्तावेजों के आधार पर जारी सभी प्रमाणपत्र रद्द किए जाएं।
  • पहले से हुए अवैध निर्माण को तोड़ा जाए।
    ग्रामीणों की बात प्रशासन तक—संघर्ष जारी**

ज्ञापन में भूमि संबंधित रिकॉर्ड, म्यूटेशन, ग्राम सभा प्रस्ताव और राजस्व दस्तावेजों की प्रतियां संलग्न की गईं।

रैली में सतपोन, कतपोन, शेखपुरा, सोनकच्छ, पाटन सहित विभिन्न गांवों के बड़ी संख्या में ग्रामीण और जनप्रतिनिधि शामिल हुए।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक बूचड़खाना अनुमति पूर्णतः निरस्त नहीं होती, विरोध आंदोलन जारी रहेगा।

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