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सीहोर | 31 मार्च, 2026 संस्कृत को पुनः व्यवहार की भाषा बनाने और इसके वैश्विक विकास के उद्देश्य से संस्कृतभारती मध्यभारत द्वारा एक विशेष अभियान चलाया जा रहा है। अब कोई भी व्यक्ति पत्राचार माध्यम से घर बैठे आसानी से संस्कृत सीख सकता है। इस अभियान की रूपरेखा तैयार करने के लिए रविवार को सीहोर में एक जिला स्तरीय गोष्ठी संपन्न हुई।
प्रमुख बिंदु: कैसे सीखें संस्कृत?
बैठक में उपस्थित पदाधिकारियों ने पाठ्यक्रम और पंजीयन (Registration) से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी साझा की:
- कोर्स की अवधि: यह 6-6 माह का एक विशेष कोर्स है।
- प्रवेश प्रक्रिया: सबसे पहले ‘प्रवेश’ पाठ्यक्रम से शुरुआत होगी।
- ऑनलाइन कक्षाएं: पंजीयन के बाद शिक्षार्थियों के लिए ऑनलाइन क्लास की सुविधा भी उपलब्ध रहेगी।
- परीक्षा तिथि: इस कोर्स की परीक्षा अगस्त माह के अंतिम सप्ताह में आयोजित की जाएगी।
अभियान के मुख्य उद्देश्य
| विषय | विवरण |
| व्यवहार भाषा | संस्कृत को दैनिक बोलचाल का हिस्सा बनाना। |
| पत्राचार माध्यम | घर बैठे सुलभ शिक्षा प्रदान करना। |
| सांस्कृतिक पुनरुत्थान | भारत की गौरवशाली भाषा के माध्यम से संस्कृति को बचाना। |
| गीता पारायण | संस्कृतभारती द्वारा एक वर्ष का गीता पारायण अभियान भी चलाया जा रहा है। |
गोष्ठी में क्या बोले पदाधिकारी?
“संस्कृतभारती संस्कृत को फिर से व्यवहार की भाषा बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। हम सभी से आग्रह करते हैं कि इस अभियान से जुड़ें।” > — पंडित पृथ्वीवल्लभ दुबे, जिला अध्यक्ष
- लखनलाल महेश्वरी (जिला संपर्क प्रमुख): उन्होंने बताया कि वर्तमान में पंजीयन की प्रक्रिया चल रही है।
- सुरेन्द्रपाल सिंह यादव (जिला सहमंत्री): उन्होंने पाठ्यक्रम की सरलता और ऑनलाइन कक्षाओं के महत्व पर प्रकाश डाला।
- राकेश सिंह (जिला मंत्री): उन्होंने सांस्कृतिक पुनरुत्थान के लिए ‘गीता पारायण’ अभियान का विषय रखा।
इनकी रही गरिमामयी उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण बैठक में जिला प्रचार प्रमुख जितेंद्र राठौर, डॉ. धर्मेंद्र शर्मा, जितेंद्र कुमार सिंह, अजेंद्र यादव, विष्णुप्रसाद परमार सहित श्रीमती सुनीता यादव, निशा सिंह, मेघा ठाकुर और बसंती यादव ने सक्रिय भागीदारी की और अपने विचार व्यक्त किए।




