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अशोकनगर/चंदेरी | ऐतिहासिक नगर चंदेरी में शनिवार से तीन दिवसीय गणगौर उत्सव का आगाज़ बेहद श्रद्धा और उत्साह के साथ हुआ। करीब डेढ़ सदी (150 वर्ष) पुरानी इस परंपरा को देखने के लिए न केवल स्थानीय लोग, बल्कि आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु उमड़े।
बेसन और मैदे के आभूषणों से अनूठा श्रृंगार
उत्सव के पहले दिन चंदेरी की महिलाओं ने घरों में मिट्टी से बनी भगवान शिव और माता पार्वती (ईसर-गणगौर) की प्रतिमाओं का अलौकिक श्रृंगार किया।
- विशेषता: प्रतिमाओं को बेसन और मैदा से तैयार पारंपरिक आभूषणों के साथ-साथ असली सोने-चांदी के गहनों से भी सजाया गया।
- पूजन: विधि-विधान से पूजा-अर्चना के बाद सुख-समृद्धि की कामना की गई।
भव्य शोभायात्रा और लोक संस्कृति की झलक
शाम होते ही फूटाकुआं मोहल्ले से एक विशाल शोभायात्रा निकाली गई, जिसने पूरे नगर को भक्तिमय कर दिया।
- चल समारोह: सिर पर सजी हुई प्रतिमाएं धारण किए महिलाएं मंगल गीत गाती हुई नगर के प्रमुख मार्गों से गुजरीं।
- सुरक्षा व्यवस्था: प्रतिमाओं पर कीमती आभूषण होने के कारण पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। पूरे मार्ग में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
- सांस्कृतिक रंग: शोभायात्रा ऐतिहासिक माँ जागेश्वरी मेला स्थल पहुँची, जहाँ देर रात तक लोकनृत्यों और भक्ति भजनों की प्रस्तुति दी गई।
81वां माँ जागेश्वरी देवी मेला: आकर्षण के केंद्र
गणगौर उत्सव के साथ ही चंदेरी में नगरपालिका परिषद द्वारा आयोजित 81वें माँ जागेश्वरी देवी कृषि एवं पशु मेले की रौनक भी बढ़ गई है।
| मुख्य आकर्षण | विवरण |
| अवधि | 5 अप्रैल तक जारी रहेगा |
| मनोरंजन | बड़े झूले, सर्कस, मौत का कुआं और सांस्कृतिक मंच |
| पुरस्कार | सर्वश्रेष्ठ पशु और बेहतरीन सजावट के लिए प्रतिभागियों को मिलेगा सम्मान |
| व्यवस्था | मेला अधिकारी प्रदीप शर्मा द्वारा बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं |




