छत्तीसगढ़ बना अफीम का नया ‘हब’? 15 दिनों में चौथी बड़ी कार्रवाई, रायगढ़ में डेढ़ एकड़ की खेती पकड़ी गई

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छत्तीसगढ़ / छत्तीसगढ़ के शांत इलाकों में अफीम (Opium) की अवैध खेती के तार अब गहरे होते जा रहे हैं। रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक के आमाघाट में पुलिस ने दबिश देकर करीब डेढ़ एकड़ में फैली अफीम की फसल को पकड़ा है। राज्य में पिछले 15 दिनों के भीतर यह चौथा बड़ा मामला है, जो पुलिस और प्रशासन के लिए खतरे की घंटी है।

📍 रायगढ़ केस: तरबूज की आड़ में “काला सोना”

रायगढ़ के आमाघाट में अपराधी बेहद शातिर तरीके से काम कर रहे थे। पुलिस जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं:

  • साजिश: स्थानीय किसान से खेत तरबूज और ककड़ी उगाने के नाम पर किराए पर लिया गया था।
  • झारखंड कनेक्शन: इस अवैध धंधे का मुख्य सूत्रधार झारखंड का रहने वाला है।
  • गिरफ्तारी: पुलिस ने मार्शल सांगां (निवासी झारखंड) को हिरासत में लिया है, जो मौके पर खेती की देखरेख कर रहा था।

🗓️ अफीम डायरी: 15 दिन, 4 बड़े कांड

छत्तीसगढ़ में मार्च का महीना नशे की खेती के खुलासे के नाम रहा है। देखिए अब तक कहाँ-कहाँ हुई कार्रवाई:

तारीखस्थानरकबा (एकड़)मुख्य विवरण
20 मार्चतमनार, रायगढ़1.5 एकड़झारखंड के आरोपी द्वारा तरबूज की आड़ में खेती।
12 मार्चकोरंधा, बलरामपुर2.5 एकड़3 किसानों की जमीन पर खेती, प्रशासन ने फसल उखड़वाई।
10 मार्चकुसमी, बलरामपुर3.67 एकड़4.75 करोड़ की अफीम जब्त, 7 आरोपी गिरफ्तार।
07 मार्चसमोदा, दुर्ग5.62 एकड़7.88 करोड़ की अफीम, BJP नेता समेत 3 गिरफ्तार।

🔍 बलरामपुर: दुर्गम पहाड़ियों का फायदा उठा रहे तस्कर

बलरामपुर का तुर्रापानी (खजूरी पंचायत) इलाका झारखंड की सीमा से लगा हुआ है। पहाड़ी और दुर्गम रास्ता होने के कारण यहाँ बाहरी लोगों का आना-जाना कम रहता है। तस्कर इसी भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर छिपकर अफीम उगा रहे थे। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के “मास्टरमाइंड” की तलाश कर रही है।

🚩 राजनीतिक गलियारों में हलचल

दुर्ग मामले में पूर्व किसान मोर्चा अध्यक्ष (भाजपा) विनायक ताम्रकर की गिरफ्तारी के बाद से प्रदेश की सियासत भी गरमाई हुई है। 5 साल से चल रही इस अवैध खेती ने स्थानीय खुफिया तंत्र (Local Intelligence) पर भी बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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