Drnewsindia.com/मध्य प्रदेश सरकार ने पंचायत राज व्यवस्था में बड़ा बदलाव करने की तैयारी शुरू कर दी है — अब जिला पंचायत और जनपद पंचायत के अध्यक्षों का चुनाव प्रत्यक्ष (डायरेक्ट) प्रणाली से कराया जा सकता है, यानी वही तरीका जो महापौर के लिए अपनाया जाता है। राज्य सरकार ने इस प्रक्रिया का मसौदा तैयार करने के लिए समिति गठित कर दी है और अगले विधानसभा सत्र में पंचायत राज अधिनियम में संशोधन प्रस्ताव लाने की संभावना जताई जा रही है।
सुझाव
- जनता सीधे चुनेगी जिला-जनपद अध्यक्ष: मध्य प्रदेश में पंचायत चुनावों में बड़ा बदलाव
- अब सरपंच की तरहः जनपद व जिला पंचायत अध्यक्ष होंगे प्रत्यक्ष चुनाव से चुने गए
- पंचायत राज में पारदर्शिता का दावा — सरकार ने प्रत्यक्ष चुनाव की रूपरेखा तैयार की
क्या प्रस्तावित है?
- वर्तमान में मध्य प्रदेश में जिला पंचायतों (52) और जनपद पंचायतों (313) के अध्यक्ष अप्रत्यक्ष प्रणाली से चुने जाते हैं — पहले सदस्य चुने जाते हैं और फिर उन सदस्यों के बीच अध्यक्ष का चुनाव होता है।
- प्रस्तावित बदलाव के अनुसार जनता सीधे इन अध्यक्षों को चुनेगी; यह चुनाव दलीय आधार (पार्टी-सिंबल) पर भी हो सकते हैं — यानी राजनीतिक दल उम्मीदवारों को खुले तौर पर समर्थन या टिकट दे सकेंगे।
- नगरीय निकायों (नगर निगम/नगर पालिका/नगर पंचायत) में नगर परिषद अध्यक्ष के चुनाव को भी प्रत्यक्ष प्रणाली में लाने का विचार है — जैसे महापौर का चुनाव पहले से प्रत्यक्ष होता है।
तर्क और उद्देश्य
- अप्रत्यक्ष प्रणाली में अक्सर सदस्य-स्तर पर जोड़-तोड़, खरीद-फरोख्त और राजनीतिक दखलअंदाजी की शिकायतें आती रही हैं।
- सरकार और कुछ राजनीतिक व पॉलिटिकल एक्सपर्ट मानते हैं कि प्रत्यक्ष चुनाव से अध्यक्षों की जनता के प्रति जवाबदेही बढ़ेगी और पारदर्शिता आएगी।
- प्रत्यक्ष चुनाव से जनता को सीधा जनादेश मिलेगा और विवादास्पद मध्यवर्ती चरण (सदस्यों द्वारा स्पष्ट बैठकों/घोड़बाशी) समाप्त होंगे।
क्या तैयारियाँ चल रही हैं?
- पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर संशोधन प्रक्रिया शुरू कर दी है।
- एक समिति गठित की गई है जो अन्य राज्यों में लागू प्रत्यक्ष पंचायत चुनाव व्यवस्था का अध्ययन कर रही है। इसी अध्ययन के आधार पर संशोधन प्रस्ताव का मसौदा तैयार होगा।
- आगामी विधानसभा सत्र में संशोधन प्रस्ताव लाने की संभाव्यता पर काम चल रहा है — यदि विधानसभा से पास हुआ तो कानून में बदलाव का रास्ता खुलेगा।
वर्तमान संरचना — कैसे चुनाव होते हैं अभी?
- मध्य प्रदेश की त्रि-स्तरीय पंचायत व्यवस्था में वर्तमान में जनपद/जिला अध्यक्षों का चुनाव निर्वाचित सदस्यों के बीच होता है।
- एक जिले में औसतन 15 सदस्य चुने जाते हैं; फिर उन्हीं चुने गए सदस्यों के बीच अध्यक्ष/उपाध्यक्ष का चयन होता है।
- इस अप्रत्यक्ष पद्धति में अक्सर दलों का प्रभाव बना रहता है — गैर-दलीय चुनाव दिखने के बावजूद राजनीतिक दलों का साया रहता है।
संभावित लाभ और चुनौतियाँ
लाभ
- सीधी जवाबदेही: अध्यक्ष सीधे मतदाताओं के प्रति जिम्मेदार होंगे।
- पारदर्शिता: सदस्य-स्तर की खरीद-फरोख्त के आरोप घट सकते हैं (कम से कम औपचारिक तौर पर)।
- जनादेश स्पष्ट: जनता स्पष्ट रूप से निर्णय ले पाएगी कि किस व्यक्ति/पार्टी को अध्यक्ष चाहिए।
चुनौतियाँ / सवाल
- पार्टीकरण: गैर-दलीय महौल पर असर — पंचायत चुनावों में पारंपरिक रूप से गैर-पार्टीफाइंग होने का तर्क रहा है; प्रत्यक्ष होने पर राजनीतिक दलों का प्रभाव और बढ़ सकता है।
- लागत व चुनावी जटिलता: अधिक पदों पर सीधे चुनाव कराना प्रशासन तथा वित्तीय रूप से भारी पड़ सकता है।
- छोटे/कमज़ोर ग्रामीण उम्मीदवारों पर असर: संसाधन वाले दल और मजबूत उम्मीदवारों का दबदबा बढ़ सकता है; स्थानीय स्तर की राजनीति और सामाजिक समीकरण बदल सकते हैं।
- कानूनी-प्रावधान व कार्यान्वयन: पंचायत राज अधिनियम में संशोधन एवं निर्वाचन प्रक्रिया, मतदाता लिस्टिंग, वोटिंग पदबंध आदि पर व्यावहारिक रूप से काम करना होगा।
क्या उम्मीद रखें?
- पंचायत संचालनालय अन्य राज्यों की प्रत्यक्ष प्रणाली का अध्ययन पूरा करेगा और उसके आधार पर संशोधन-मसौदा तैयार होगा।
- मसौदा तैयार होने के बाद उसे कैबिनेट/विधानसभा में लाया जाएगा — विधायी मंजूरी के बिना बदलाव लागू नहीं हो सकता।
- यदि पारित हुआ, तो चुनाव आयुक्तालय/राज्य निर्वाचन आयोग एवं प्रशासन को नई व्यवस्थाओं (बैलट/ईवीएम, प्रचार नियम, मतदाता जानकारी) के लिए तैयार होना होगा।




