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शुक्रवार को हुई दोनों घटनाएं कचरे के प्रबंधन से जुड़ी हैं:
- पहली घटना: दोपहर में एमपी फॉरेस्ट कंपनी के पास (जल्द काबू पाया गया)।
- दूसरी घटना: रात 10 बजे आयशर फैक्ट्री और श्मशान घाट के बीच (1 घंटे की मशक्कत के बाद बुझाई गई)।

मंडीदीप फायर ब्रिगेड: एक नजर में
| संसाधन | संख्या / स्थिति |
| फायर टेंडर | 2 बड़े, 1 मिनी |
| वॉटर टेंडर/टैंकर | 1 वॉटर टेंडर, 2 टैंकर |
| निजी बैकअप | HEG, लूपिन और वर्धमान जैसी कंपनियों की अपनी दमकलें। |
| पिछले साल का रिकॉर्ड | 261 घटनाएं (जिनमें 150+ बड़ी औद्योगिक आग थीं)। |
सबसे बड़ी चुनौती: सूचना तंत्र का अभाव
रिपोर्ट की सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इतने बड़े औद्योगिक क्षेत्र होने के बावजूद नगर पालिका के पास कोई सीधा हेल्पलाइन नंबर नहीं है।
- वर्तमान स्थिति: लोग डायल 100 या कर्मचारियों के व्यक्तिगत नंबरों पर निर्भर हैं।
- जोखिम: आगजनी के मामलों में शुरुआती 5-10 मिनट ‘गोल्डन ऑवर’ होते हैं। सीधा नंबर न होने से सूचना पहुंचने में देरी हो सकती है, जो किसी बड़ी औद्योगिक इकाई के लिए विनाशकारी साबित हो सकती है।

सावधानी के उपाय (मार्च-जून अवधि)
चूंकि अब संवदेनशील समय शुरू हो चुका है, कंपनियों और प्रशासन को इन बातों पर ध्यान देना चाहिए:
- फैक्ट्रियों के बाहर खुले में कचरा जमा न होने दें, क्योंकि गर्मी में सूखी घास और कचरा तुरंत आग पकड़ते हैं।
- नगर पालिका को एक समर्पित फायर हेल्पलाइन जारी करनी चाहिए।
- औद्योगिक क्षेत्रों में ‘फायर ऑडिट’ नियमित रूप से किया जाना चाहिए।




