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नई दिल्ली | 13 मार्च 2026 देश की राजधानी दिल्ली में इस साल गर्मी के साथ-साथ बिजली की मांग भी सारे रिकॉर्ड तोड़ने को तैयार है। अनुमान है कि दिल्ली की पीक पावर डिमांड (Peak Power Demand) पहली बार 9000 मेगावाट के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर जाएगी।
क्यों बढ़ रही है मांग?
बढ़ती आबादी, भीषण गर्मी और एयर कंडीशनर (AC) के अंधाधुंध इस्तेमाल ने बिजली कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले साल यानी 2025 में अधिकतम मांग 8442 मेगावाट दर्ज की गई थी।
ग्रीन पावर (Green Power) बनेगी दिल्ली का सुरक्षा कवच
हैरानी की बात यह है कि इस भारी मांग के बावजूद दिल्ली को ब्लैकआउट से बचाने के लिए 2670 मेगावाट हरित ऊर्जा (Green Energy) तैनात रहेगी।
ग्रीन पावर का ब्रेकअप: | ऊर्जा का स्रोत | अनुमानित आपूर्ति | | :— | :— | | सोलर ऊर्जा (Solar) | 840 मेगावाट | | हाइड्रो पावर (Hydro) | 572 मेगावाट | | पवन ऊर्जा (Wind) | 500 मेगावाट | | पंप्ड स्टोरेज/रूफटॉप सोलर | 562 मेगावाट | | वेस्ट टू एनर्जी/अन्य | 196 मेगावाट |
विशेष तकनीकी सहायता: किलोकरी में लगा 20 मेगावाट का बैटरी स्टोरेज सिस्टम (BESS) पीक ऑवर्स के दौरान ग्रिड को स्थिर रखने में ‘बैकअप’ का काम करेगा।
किस क्षेत्र में कितनी होगी मांग?
BSES के आंकड़ों के अनुसार, दिल्ली की लगभग 2.25 करोड़ आबादी को निर्बाध बिजली देने के लिए तैयारी पूरी है:
- दक्षिण और पश्चिम दिल्ली (BRPL): मांग 3798 MW (2025) से बढ़कर 3997 MW होने का अनुमान।
- पूर्व और मध्य दिल्ली (BYPL): मांग 1824 MW (2025) से बढ़कर 1991 MW होने का अनुमान।
भविष्य की चेतावनी: 2029 तक 10,000 मेगावाट!
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बिजली की खपत इसी रफ्तार से बढ़ती रही, तो साल 2028-29 तक दिल्ली की मांग 10,000 मेगावाट के पार निकल जाएगी। बिजली कंपनियों ने सरकार को भरोसा दिलाया है कि वे इस चुनौती के लिए अभी से कमर कस चुकी हैं।
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