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लेह / नई दिल्ली, 6 अक्टूबर 2025 — लद्दाख के जाने-माने समाजसेवी, शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने जेल से बयान जारी कर कहा है कि वे लद्दाख हिंसा की न्यायिक जांच होने तक जेल में ही रहेंगे। वांगचुक वर्तमान में जोधपुर सेंट्रल जेल में बंद हैं, जहां उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत गिरफ्तार किया गया है।
घटना की पृष्ठभूमि
24 सितंबर को लद्दाख की राजधानी लेह में राज्य का दर्जा और छठी अनुसूची (Sixth Schedule) में शामिल किए जाने की मांग को लेकर चल रहे आंदोलन के दौरान हिंसा भड़क उठी थी। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प में चार लोगों की मौत हो गई और कई घायल हुए।
हिंसा के अगले दिन पुलिस ने सोनम वांगचुक को “भड़काऊ भाषण” और “विदेशी फंडिंग में गड़बड़ी” के आरोपों में हिरासत में ले लिया और बाद में उन्हें NSA के तहत जेल भेज दिया गया।
जेल से वांगचुक का संदेश
जेल से जारी अपने संदेश में सोनम वांगचुक ने कहा —

“मैं न्याय मिलने तक जेल में रहूंगा। मैं मानसिक और शारीरिक रूप से स्वस्थ हूं और अपने समर्थकों के प्रेम और समर्थन के लिए आभारी हूं।”
उन्होंने जनता से अहिंसक तरीके से आंदोलन जारी रखने की अपील की और कहा कि गांधीवादी मार्ग ही सच्चा रास्ता है।
वांगचुक ने कहा कि लद्दाख के लोग वर्षों से अपने संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, और अब समय है कि सरकार स्वतंत्र न्यायिक जांच कराए ताकि हिंसा की सच्चाई सामने आ सके।
अदालत में सुनवाई की स्थिति
सोनम वांगचुक की पत्नी गीतेन्जली जे. अंगमो ने उनके गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार, लद्दाख प्रशासन और जोधपुर जेल प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है, लेकिन अभी तक कोई राहत नहीं दी गई है। अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को निर्धारित की गई है।
अंगमो ने आरोप लगाया है कि उनके पति को “राजनीतिक दबाव” में गलत तरीके से गिरफ्तार किया गया है और सरकार उन्हें “राष्ट्रविरोधी” बताने की साजिश कर रही है। उन्होंने कहा —

“सोनम को बदनाम करने के लिए झूठ फैलाया जा रहा है। यह एक सुनियोजित अभियान है।”
विरोध और प्रतिक्रियाएं
- मुंबई, दिल्ली और लेह में सामाजिक कार्यकर्ताओं और पर्यावरण प्रेमियों ने सोनम वांगचुक की रिहाई की मांग करते हुए प्रदर्शन किए।
- कई संगठनों ने इसे “लोकतांत्रिक आवाज़ों को दबाने का प्रयास” बताया है।
- वहीं लद्दाख प्रशासन ने अपने कदमों का बचाव करते हुए कहा कि वांगचुक के खिलाफ कार्रवाई “विश्वसनीय इनपुट और दस्तावेजों” के आधार पर की गई है, न कि किसी “राजनीतिक बदले” के तहत।
क्या चाहते हैं वांगचुक?
सोनम वांगचुक और लद्दाख के लोग केंद्र सरकार से दो प्रमुख मांगे कर रहे हैं —
- लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा मिले।
- लद्दाख को संविधान की छठी अनुसूची में शामिल किया जाए, ताकि वहां के पर्यावरण, संस्कृति और जमीन पर स्थानीय समुदायों का अधिकार बना रहे।

सोनम वांगचुक: हिमालय के सच्चे नवोन्मेषक
सोनम वांगचुक का जन्म 1 सितंबर 1966 को लद्दाख के उपशी गांव में हुआ। वे एक इंजीनियर, पर्यावरणविद् और शिक्षा सुधारक हैं, जिन्होंने हिमालय के कठिन जीवन में विज्ञान और नवाचार का संतुलन स्थापित किया।
उन्होंने 1988 में SECMOL (Students’ Educational and Cultural Movement of Ladakh) की स्थापना की, जहाँ बच्चों को व्यवहारिक और स्थानीय परिस्थितियों पर आधारित शिक्षा दी जाती है।
सोनम वांगचुक का सबसे प्रसिद्ध आविष्कार आइस स्तूप है — एक कृत्रिम ग्लेशियर, जो सर्दियों में पानी को जमा कर गर्मियों में सिंचाई के लिए उपलब्ध कराता है। इस तकनीक से लद्दाख के सूखे इलाकों में खेती संभव हुई है।

उन्होंने HIAL (Himalayan Institute of Alternatives, Ladakh) की भी स्थापना की, जो टिकाऊ विकास और स्वदेशी नवाचारों पर कार्य करता है।सोनम वांगचुक की पत्नी का नाम तान्या वांगचुक (Tanya Wangchuk) है।
वह भी उनके साथ सामाजिक और शैक्षणिक कार्यों में सहयोग करती हैं।दोनों लद्दाख में मिलकर SECMOL और HIAL जैसे प्रोजेक्ट्स से स्थानीय युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का काम कर रहे हैं।
वांगचुक को उनके योगदान के लिए रामोन मैग्सेसे पुरस्कार (2018) सहित कई अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिले हैं।
सादगी और प्रकृति के प्रति समर्पण के प्रतीक वांगचुक का संदेश है — “सादा जीवन, उच्च विचार और पर्यावरण के साथ तालमेल ही असली प्रगति है।”





