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आंध्र प्रदेश के मछलीपट्टनम तट पर चक्रवाती तूफान ‘मोन्था’ का लैंडफॉल (टकराने की प्रक्रिया) शुरू हो गया है। तटवर्ती इलाकों में 100 किमी/घंटा की तेज हवाएं चल रही हैं, जिससे समुद्री लहरें उठकर किनारे के कई घर गिरा चुकी हैं। मौसम विभाग के मुताबिक, तूफान के पूरी तरह टकराने के बाद हवा की गति 110 किमी/घंटा तक पहुंच सकती है और समुद्र में 5 मीटर (लगभग 16 फीट) ऊंची लहरें उठने की संभावना है।
तूफान का मौजूदा हाल
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, मोन्था तूफान का केंद्र वर्तमान में—
- मछलीपट्टनम से लगभग 90 किमी दूर,
- काकीनाडा से 100 किमी,
- और विशाखापट्टनम से 220 किमी दूर है।
यह तूफान 17 किमी/घंटा की रफ्तार से उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ रहा है और बुधवार सुबह ओडिशा तट से टकराएगा।

52 फ्लाइट्स और 120 ट्रेनें रद्द
तूफान का असर आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, बंगाल और ओडिशा तक दिखाई दे रहा है।
- कई जगह 80-90 किमी/घंटा की रफ्तार से हवाएं चल रही हैं।
- सैकड़ों पेड़ उखड़ गए, बिजली व्यवस्था बाधित हुई।
- चारों राज्यों के तटीय इलाकों से 50,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा गया।
रेल और हवाई सेवा पर असर:
- दक्षिण मध्य रेलवे ने सोमवार-मंगलवार को 120 ट्रेनें रद्द कीं।
- विशाखापट्टनम एयरपोर्ट से सभी 32 फ्लाइट्स रद्द की गईं।
- विजयवाड़ा से 16 और तिरुपति से 4 उड़ानें कैंसिल की गई हैं।
तूफान का रूट और असर
IMD के मुताबिक, मोन्था के प्रभाव से अगले तीन दिन तक निम्नलिखित राज्यों में भारी बारिश हो सकती है—
केरल, कर्नाटक, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, राजस्थान और झारखंड।
‘मोन्था’ नाम थाईलैंड ने दिया है। थाई भाषा में इसका अर्थ होता है “सुगंधित फूल”।
मोन्था तूफान की ग्राउंड रिपोर्ट
- आंध्र और तमिलनाडु के तटीय क्षेत्रों में लगातार भारी बारिश।
- समुद्री लहरें कई गांवों में घुसीं।
- बिजली कटौती और सड़क यातायात बाधित।
- बचाव दल और NDRF टीमें तैनात।
- मछुआरों को समुद्र में न जाने की सख्त चेतावनी।





