Drnewsindia/भोपाल।
खाने-पीने की चीजों में मिलावट का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है और इसका सबसे गंभीर असर डेयरी उत्पादों, खासकर पनीर पर देखने को मिल रहा है। केंद्र सरकार की एक रिपोर्ट ने इस समस्या को उजागर करते हुए बताया है कि पनीर में मिलावट के मामलों में मध्यप्रदेश देश में चौथे स्थान पर है। बीते एक वर्ष में प्रदेश में जांचे गए पनीर सैंपलों में से करीब 20 प्रतिशत सैंपल फेल पाए गए हैं।
केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, पनीर में मिलावट के मामलों में उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब मध्यप्रदेश से आगे हैं, हालांकि इन राज्यों और एमपी के आंकड़ों में बहुत ज्यादा अंतर नहीं है। रिपोर्ट ने साफ तौर पर खाद्य सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
पनीर में क्या मिलाया जा रहा है?
रिपोर्ट के अनुसार, पनीर में मिलावट के लिए सबसे अधिक स्टार्च और सुक्रोज का इस्तेमाल किया जा रहा है। कई मामलों में दूध की मात्रा कम कर कृत्रिम तत्वों और केमिकल्स के जरिए पनीर तैयार किया जा रहा है, जिससे उसकी गुणवत्ता और पोषण दोनों प्रभावित हो रहे हैं।
वर्ष 2024-25 के दौरान मध्यप्रदेश में कुल 1077 पनीर सैंपलों की जांच की गई। इनमें से 234 सैंपल या तो मानकों पर खरे नहीं उतरे या उनमें किसी न किसी प्रकार की मिलावट पाई गई।
वहीं, पूरे देश में इसी अवधि के दौरान 230 से अधिक पनीर सैंपल जांच में फेल पाए गए, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है।
राज्यसभा में पेश हुई रिपोर्ट
पनीर में मिलावट से जुड़ी यह रिपोर्ट केंद्र सरकार द्वारा राज्यसभा में प्रस्तुत की गई। शीतकालीन सत्र के दौरान एक लिखित प्रश्न के उत्तर में सरकार ने ये आंकड़े सदन के सामने रखे।
9 दिसंबर को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और कांग्रेस सांसद जेबी माथेर हिशाम ने सरकार से सवाल किया था कि क्या एफएसएसएआई (FSSAI) या राज्य खाद्य सुरक्षा विभागों ने पिछले पांच वर्षों में मिलावटी पनीर की जांच की है और उसके क्या नतीजे रहे हैं।
राष्ट्रीय स्तर की चुनौती
सरकार के जवाब में सामने आए आंकड़ों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पनीर में मिलावट अब केवल स्थानीय या राज्य स्तरीय समस्या नहीं रही, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर की गंभीर चुनौती बन चुकी है।
खाद्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सख्त निगरानी, नियमित जांच और कठोर कार्रवाई नहीं की गई, तो इसका सीधा असर आम लोगों की सेहत पर पड़ेगा।




