पुरानी धारणाओं को छोड़ आरएसएस की वास्तविकता जानें: भागवत

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गुवाहाटी में युवाओं से संवाद: दुष्प्रचार के बजाय तथ्य आधारित जानकारी पर राय बनाएं

Drnewsindia.com/गुवाहाटी/मुंबई। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने पूर्वोत्तर के युवाओं से आग्रह किया कि वे आरएसएस के बारे में अपनी राय पुरानी धारणाओं या भ्रामक प्रचार के आधार पर न बनाएं। उन्होंने कहा कि संगठन को लेकर कई मंचों पर फैली 50% से अधिक जानकारियाँ गलत या अधूरी हैं, जबकि वास्तविकता इससे बिल्कुल विपरीत है।

भागवत तीन दिवसीय दौरे के अंतिम दिन यूथ लीडरशिप कॉन्क्लेव में युवाओं को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि तथ्य आधारित समझ ही संगठन के बारे में सही राय बनाने में मदद करती है।


“भारत को विश्वगुरु बनाना — यही आरएसएस का मूल लक्ष्य”

भागवत ने कहा कि संघ का उद्देश्य वही है जो संस्थापक डॉ. हेडगेवार ने देखा था —
एक सशक्त, संगठित और संस्कारी समाज का निर्माण

उन्होंने कहा —

“कोई भी राष्ट्र तभी आगे बढ़ता है, जब उसका समाज मजबूत और एकजुट हो।”

भागवत ने विकसित देशों के इतिहास का उदाहरण देते हुए कहा कि उनकी प्रगति के पीछे शुरुआती सौ वर्षों तक समाज निर्माण की मजबूत नींव रही है।


विविधता — भारत की सबसे बड़ी शक्ति

भागवत के अनुसार—

  • भारत भाषाओं, क्षेत्रों और मान्यताओं की विविधता से समृद्ध
  • हिंदू स्वभाव से विविधताओं का सम्मान करने वाले
  • इस आधार पर एक मजबूत और समता आधारित समाज संभव

उन्होंने कहा —

“मेरा मार्ग सही है, लेकिन आपकी जगह पर आपका मार्ग भी सही हो सकता है।”

भागवत ने पाकिस्तान जैसे अलग हुए देशों का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने इस परंपरा को खो दिया, जिसका परिणाम आज सबके सामने है।


चरित्र निर्माण पर जोर — शाखा से समाज निर्माण

भागवत ने कहा कि:

  • आरएसएस की शाखाएँ व्यक्तित्व और चरित्र निर्माण का माध्यम हैं
  • भ्रष्टाचार केवल कानून से नहीं, संस्कार से खत्म हो सकता है

उन्होंने गुरु नानक और श्रीमंत शंकरदेव का उदाहरण देते हुए कहा कि दोनों ने विविधता में एकता का संदेश दिया था।


युवाओं से अपील

भागवत ने युवाओं से कहा कि—

  • अपनी रुचि, समय और योग्यता अनुसार आरएसएस से जुड़ें
  • मजबूत भारत बनेगा तो पूर्वोत्तर और बाकी देश के बीच सभी चिंताएँ स्वत: दूर होंगी

संघ प्रमुख गुरुवार को अपने अगले पड़ाव मणिपुर के लिए रवाना होंगे।


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