फर्जी फैसला कांड: निलंबित जज विजेंद्रसिंह रावत SIT के सामने पेश, IAS संतोष वर्मा मामला फिर चर्चा में

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Drnewsindia.com/इंदौर।
मध्यप्रदेश के चर्चित फर्जी फैसला कांड में निलंबित न्यायाधीश विजेंद्रसिंह रावत गुरुवार को विशेष जांच दल (SIT) के समक्ष पेश हुए। रावत दो वकीलों के साथ कोतवाली थाने पहुंचे, जहां उन्होंने अपनी अग्रिम जमानत से जुड़े दस्तावेज जांच अधिकारियों को सौंपे और इसके बाद रवाना हो गए।

मामले की जांच कर रहे एसीपी विनोद दीक्षित ने विवेचना के संबंध में रावत से लिखित सवालों के जवाब मांगे हैं। इससे पहले बुधवार को एसीपी द्वारा उन्हें नोटिस जारी कर पेश होने के निर्देश दिए गए थे।

खुद फरियादी हैं जज रावत

दिलचस्प पहलू यह है कि एमजी रोड थाने में दर्ज इस प्रकरण में विजेंद्रसिंह रावत खुद फरियादी हैं। आरोप है कि उनकी अदालत से जारी एक फर्जी फैसले के आधार पर ही राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी रहे संतोष वर्मा को आईएएस अवॉर्ड आवंटित हुआ था।

इस मामले में संतोष वर्मा की गिरफ्तारी चार साल पहले हो चुकी है, जबकि हाल ही में विजेंद्रसिंह रावत ने अग्रिम जमानत हासिल की है।

एसीपी कार्यालय पहुंचे रावत

गुरुवार को पूर्व न्यायाधीश वी.के. सोने के साथ विजेंद्रसिंह रावत एसीपी कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने जमानत से जुड़े कागजात पेश किए। इसके बाद पुलिस ने विवेचना से संबंधित बिंदुओं पर लिखित में जवाब देने को कहा है।

जमानत निरस्त कराने की तैयारी

उधर, पुलिस ने IAS संतोष वर्मा की जमानत खारिज कराने की पूरी तैयारी कर ली है। एसीपी विनोद दीक्षित के अनुसार,
जिस फैसले के आधार पर संतोष वर्मा को आईएएस अवॉर्ड मिला, उस विवादित दस्तावेज पर विजेंद्रसिंह रावत के हस्ताक्षर हैं। पुलिस उस दस्तावेज की फॉरेंसिक जांच कराना चाहती है।

एसीपी ने बताया कि जांच के दौरान जब संतोष वर्मा से हस्ताक्षर के नमूने मांगे गए तो उन्होंने इनकार कर दिया। पुलिस का कहना है कि यह जमानत की शर्तों का उल्लंघन है। इसी आधार पर अब अदालत के सामने मजबूती से पक्ष रखा जाएगा।

जांच के अगले चरण पर नजर

फर्जी फैसला कांड में SIT की सक्रियता के बाद यह मामला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। अब सभी की नजरें रावत द्वारा दिए जाने वाले लिखित जवाबों और कोर्ट में पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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