फिजिक्स-केमिस्ट्री और मेडिसिन में नोबेल: 3-3 वैज्ञानिकों को मिला सम्मान, केमिस्ट्री की खोज का ‘हैरी पॉटर’ से कनेक्शन

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क्वांटम टनलिंग, टी-सेल और मेटल ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क्स की रिसर्च ने बदली विज्ञान की परिभाषा

साल 2025 के नोबेल पुरस्कारों की घोषणा हो चुकी है। इस बार फिजिक्स, केमिस्ट्री और मेडिसिन—तीनों क्षेत्रों में 3-3 वैज्ञानिकों को सम्मानित किया गया है। इन वैज्ञानिकों की खोजों ने न केवल विज्ञान की दिशा बदली है, बल्कि भविष्य की टेक्नोलॉजी, इलाज और पर्यावरण संरक्षण के नए रास्ते भी खोले हैं।

प्रत्येक विजेता को 1.1 करोड़ स्वीडिश क्रोनर (करीब 10.3 करोड़ रुपए), एक गोल्ड मेडल और सर्टिफिकेट प्रदान किया जाएगा।


6 अक्टूबर को घोषित मेडिसिन का नोबेल अमेरिका की मैरी ई. ब्रंकॉ, फ्रेड राम्सडेल और जापान के शिमोन साकागुची को मिला है।
इन तीनों वैज्ञानिकों ने हमारे इम्यून सिस्टम की ‘पेरिफेरल इम्यून टॉलरेंस’ को समझने में बड़ी भूमिका निभाई।

उन्होंने ऐसे रेगुलेटरी टी-सेल्स की खोज की, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि शरीर की रोग-प्रतिरोधक प्रणाली अपने ही टिशूज़ या सेल्स पर हमला न करे। यह खोज ऑटोइम्यून बीमारियों (जैसे टाइप-1 डायबिटीज और रूमेटॉयड अर्थराइटिस) और कैंसर थेरेपी में नए उपचारों का आधार बनेगी।

नोबेल कमेटी ने कहा— “इन वैज्ञानिकों की खोज ने चिकित्सा विज्ञान को नई दिशा दी है, जिससे शरीर की प्रतिरक्षा को बेहतर समझना संभव हुआ।”


⚛️ फिजिक्स: क्वांटम टनलिंग से खुला नई तकनीक का द्वार

7 अक्टूबर को जॉन क्लार्क, मिशेल डेवोरेट और जॉन मार्टिनिस (तीनों अमेरिका) को फिजिक्स का नोबेल पुरस्कार मिला।
इन्होंने मैक्रोस्कोपिक क्वांटम टनलिंग को प्रयोगों के माध्यम से साबित किया—यानि यह दिखाया कि क्वांटम इफेक्ट्स केवल सूक्ष्म स्तर पर नहीं, बल्कि बड़े सिस्टम में भी संभव हैं।

उन्होंने सुपरकंडक्टिंग सर्किट्स पर प्रयोग किया, जिसमें विद्युत धारा के कण एक पतली बाधा के आर-पार चले गए—यह घटना भौतिकी के पारंपरिक नियमों से परे थी।
इस खोज ने क्वांटम कंप्यूटिंग, सुपर-सेन्सर टेक्नोलॉजी, और डेटा सिक्योरिटी के क्षेत्र में नई संभावनाएं खोली हैं।

क्लार्क और उनकी टीम ने सिद्ध किया कि क्वांटम प्रभावों को अब ‘मानव स्तर’ पर भी नियंत्रित और उपयोग किया जा सकता है।


8 अक्टूबर को केमिस्ट्री का नोबेल सुसुमु कितागावा (जापान), रिचर्ड रॉबसन (ऑस्ट्रेलिया) और उमर एम. याघी (अमेरिका) को मिला।
इन वैज्ञानिकों ने मेटल ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क्स (MOF) की खोज की — ऐसी संरचनाएं जो अंदर से स्पॉन्ज जैसी होती हैं, जिनमें गैस, दवा या रसायन सुरक्षित रूप से स्टोर किए जा सकते हैं।

नोबेल कमेटी ने इस खोज की तुलना हैरी पॉटर फिल्म की हरमाइनी के जादुई बैग से की — जो बाहर से छोटा दिखता है लेकिन अंदर से विशाल होता है।
ठीक वैसे ही, MOF में भी सूक्ष्म स्तर पर बहुत बड़े खाली स्पेस होते हैं जिनका उपयोग किया जा सकता है—

रेगिस्तान की हवा से पानी निकालने में हवा से कार्बन डाइऑक्साइड हटाने में दवाओं को शरीर में सही जगह तक पहुँचाने में स्वच्छ ईंधन (हाइड्रोजन/मीथेन) स्टोर करने में

यह खोज भविष्य में पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा भंडारण तकनीक को पूरी तरह बदल सकती है।


2025 का नोबेल— विज्ञान का उत्सव और उम्मीद का प्रतीक

इस साल के विजेताओं की खोजें विज्ञान की तीनों बुनियादी दिशाओं—जीवन, पदार्थ और ऊर्जा—को नई परिभाषा देती हैं।
एक ओर टी-सेल्स इंसान के शरीर को खुद से लड़ने से बचाते हैं,
दूसरी ओर क्वांटम टनलिंग ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने का नया रास्ता खोलती है,
और तीसरी ओर मेटल ऑर्गेनिक फ्रेमवर्क्स हमें पर्यावरण के संकट से उबारने की उम्मीद देते हैं।

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