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नई दिल्ली/पटना। बिहार की राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। सूबे के मुख्यमंत्री और कद्दावर नेता नीतीश कुमार ने शुक्रवार, 10 अप्रैल 2026 को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ग्रहण कर ली है। नई दिल्ली में आयोजित एक संक्षिप्त समारोह में राज्यसभा सभापति ने उन्हें उच्च सदन की सदस्यता की शपथ दिलाई।
दिल्ली की राजनीति में सक्रिय होंगे नीतीश
नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना बिहार की सत्ता संरचना में बड़े बदलाव का संकेत माना जा रहा है।
- इस्तीफे की चर्चा: 30 मार्च 2026 को बिहार विधान परिषद से इस्तीफा देने के बाद से ही यह तय माना जा रहा था कि वे अब राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका निभाएंगे।
- लंबा कार्यकाल: लगभग दो दशकों तक बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभालने के बाद, नीतीश कुमार का संसद के उच्च सदन में पहुंचना उनके राजनीतिक करियर का एक नया अध्याय है।
बिहार में नेतृत्व परिवर्तन की सुगबुगाहट
नीतीश कुमार के शपथ लेते ही पटना के सियासी गलियारों में ‘अगला मुख्यमंत्री कौन?’ को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में कई नाम रेस में बताए जा रहे हैं:
- सम्राट चौधरी: वर्तमान डिप्टी सीएम और बीजेपी के कद्दावर नेता।
- नित्यानंद राय: केंद्रीय गृह राज्य मंत्री।
- निशांत कुमार: नीतीश कुमार के पुत्र (हालांकि यह केवल अटकलें हैं)।
- विजय कुमार चौधरी: बिहार सरकार के वरिष्ठ मंत्री।
कैबिनेट में बड़े फेरबदल के आसार
सूत्रों की मानें तो बिहार में जल्द ही नई सरकार का गठन या कैबिनेट में व्यापक फेरबदल देखने को मिल सकता है। बीजेपी के सबसे बड़े दल के रूप में उभरने के बाद, सत्ता का नया समीकरण कैसा होगा, इस पर सबकी नज़रें टिकी हैं।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि नीतीश कुमार का केंद्र की राजनीति में जाना एनडीए (NDA) के भीतर एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। इससे न केवल बिहार में नेतृत्व की नई पीढ़ी को मौका मिलेगा, बल्कि दिल्ली में भी जेडीयू (JDU) की स्थिति मजबूत होगी।
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