बुधनी: नर्मदा किनारे NGT नियमों की धज्जियां! प्रतिबंधित 300 मीटर के दायरे में बांटे PM आवास के प्रमाण पत्र, अफसर मौन

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बुधनी (सीहोर) | 05 मार्च, 2026

नर्मदा के संरक्षण और पर्यावरण की रक्षा के लिए बने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के नियमों को बुधनी नगर परिषद ने दरकिनार कर दिया है। आरोप है कि नर्मदा नदी से महज कुछ मीटर की दूरी पर, जो कि पूरी तरह प्रतिबंधित क्षेत्र है, वहां प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत मकानों की न केवल स्वीकृति दी गई, बल्कि लाखों रुपये की किश्तें भी बांटी जा रही हैं।


📍 क्या है पूरा विवाद?

नियमों के अनुसार, नर्मदा नदी के तट से 300 मीटर तक का क्षेत्र ‘नो-कंस्ट्रक्शन जोन’ (प्रतिबंधित दायरा) घोषित है। यहां किसी भी प्रकार का पक्का निर्माण अवैध माना जाता है।

  • ताजा मामला: नगर परिषद ने हाल ही में कई हितग्राहियों को 1,00,000 रुपये की पहली किस्त के स्वीकृति प्रमाण पत्र बांटे हैं।
  • बड़ा आरोप: सूत्रों का दावा है कि इनमें से अधिकांश मकान नदी के उसी प्रतिबंधित 300 मीटर के दायरे में स्थित हैं।

📑 सर्वे रिपोर्ट के बावजूद नियमों की ‘अनदेखी’

हैरानी की बात यह है कि राजस्व विभाग के पास पहले से ही इन क्षेत्रों का सर्वे डेटा मौजूद है।

  1. पुराना सर्वे: पूर्व एसडीएम के कार्यकाल में नदी किनारे के क्षेत्रों का सर्वे कराया गया था।
  2. लापरवाही: जब सर्वे रिपोर्ट में स्पष्ट है कि कौन सा हिस्सा प्रतिबंधित है, तो नगर परिषद ने PMAY की स्वीकृतियां देने में इतनी बड़ी चूक कैसे कर दी?
  3. इतिहास: स्थानीय लोगों की मानें तो तत्कालीन सीएमओ के कार्यकाल में भी ऐसे ही नियम विरुद्ध निर्माणों की चर्चाएं रही थीं।

⚠️ अधिकारियों ने साधी चुप्पी, नागरिकों में आक्रोश

इस गंभीर घोटाले पर जब जवाब मांगा गया, तो प्रशासनिक अधिकारियों ने पल्ला झाड़ लिया:

  • नगर परिषद सीएमओ: मामले पर कुछ भी कहने से साफ इनकार कर दिया।
  • बुधनी एसडीएम: उन्होंने जानकारी न होने की बात कही और जांच के बाद ही कुछ कहने का आश्वासन दिया।

जनता का डर: स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि कल NGT या कोर्ट इन मकानों को ढहाने का आदेश देता है, तो इसका खामियाजा उन गरीब हितग्राहियों को भुगतना होगा जिन्हें प्रशासन ने अंधेरे में रखकर ये किश्तें बांटी हैं।


📊 बुधनी एक्सपोज: मुख्य बिंदु

बिन्दुविवरण
नियमनर्मदा तट से 300 मीटर तक पक्का निर्माण प्रतिबंधित।
उल्लंघनPMAY के तहत मकान स्वीकृत कर बांटे गए प्रमाण पत्र।
प्रशासनिक रुखसीएमओ और जिम्मेदार अधिकारी फिलहाल चुप।
मांगनिष्पक्ष जांच और दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई।

🧐 हमारा सवाल:

क्या बुधनी नगर परिषद के लिए NGT के नियम कोई मायने नहीं रखते? और क्या जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी या फिर से मामला फाइलों में दब जाएगा?


बने रहें बुधनी की हर हलचल के लिए [drnewsindia.com] के साथ।

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