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सीहोर/ मध्य प्रदेश के सीहोर और महाराष्ट्र के गोंदिया जिले में बुधवार और रविवार की रात अचानक आए मौसम के बदलाव ने किसानों की कमर तोड़ दी है। तेज हवाओं और ओलावृष्टि के साथ हुई बेमौसम बारिश ने खेतों में खड़ी रबी और ग्रीष्मकालीन फसलों को भारी नुकसान पहुँचाया है।
प्रकृति का प्रकोप: पक चुकी फसलें संकट में
सीहोर जिले में बुधवार देर रात शुरू हुई बारिश और तेज हवाओं ने गेंहू, चना और सब्जी की फसलों को अपनी चपेट में ले लिया है। विशेष रूप से गेंहू की फसल, जो पूरी तरह पककर कटाई के लिए तैयार थी, अब बर्बादी की कगार पर है।
मुख्य प्रभावित क्षेत्र और फसलें:
- सीहोर: गेंहू, चना और सब्जियों का नुकसान।
- जवाहरनगर परिसर: ग्रीष्मकालीन फसलों जैसे चना और गेंहू की बुआई करने वाले किसान सबसे ज्यादा प्रभावित।
- गोंदिया/आमगांव: यहाँ 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चली हवाओं और ओलावृष्टि ने फसलों को जमीन पर बिछा दिया है।
परिसर के अधिकांश किसान अल्पभूधारक हैं, जिन्होंने बैंकों, पतसंस्थाओं और साहूकारों से कर्ज लेकर फसलों की बुआई की थी। अब फसल बर्बाद होने के कारण उनके सामने न केवल घर चलाने का संकट है, बल्कि कर्ज की किस्त लौटाना भी नामुमकिन नजर आ रहा है।

“हाथ में आई फसल को कुदरत ने छीन लिया है। अब हम कर्ज कैसे चुकाएंगे? सरकार को जल्द से जल्द हमारी मदद करनी चाहिए।” — स्थानीय किसान
मौसम विभाग की चेतावनी
मौसम विभाग के अनुसार, 20 मार्च तक मौसम का मिजाज इसी तरह बना रह सकता है। हालांकि, 21 और 22 मार्च के लिए फिलहाल कोई चेतावनी जारी नहीं की गई है। किसानों को सलाह दी गई है कि यदि संभव हो तो कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थानों पर ढक कर रखें।




