भव्य सहस्त्र चंडी महायज्ञ में पूर्ण विधि-विधान से किया गया अग्रि स्थापन नित्य हवन-पूजन

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जगदंबा की आराधना से सर्वार्थ सिद्धि भगवती की लीलाएं अनंत-यज्ञाचार्य पंडित महादेव शर्मा

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सीहोर।
शहर के गंज के समीपस्थ प्रसिद्ध करोली वाली माता मंदिर में सोमवार को सुबह यहां पर 108 विप्रजनों के द्वारा पूर्ण विधि-विधान से अग्नि स्थापन नित्य हवन-पूजन का क्रम आरंभ हो गया है। माघ नवरात्रि के पावन अवसर पर संयुक्त मां कालका उत्सव समिति के तत्वाधान में दस दिवसीय महायज्ञ का आयोजन किया जा रहा है। इसमें करीब 45 से अधिक जोड़ों ने दिव्य अनुष्ठान की क्रियाएं की। इस मौके पर कार्यक्रम के अध्यक्ष विवेक राठौर, मुख्य यजमान सूत्रधार तरुण राठौर सहित अन्य ने यज्ञाचार्य पंडित महादेव शर्मा के मार्गदर्शन में यज्ञशाला में प्रवेश किया।
महायज्ञ के मीडिया प्रभारी प्रदीप समाधिया ने बताया कि सोमवार को सर्वप्रथम विप्रजनों के अलावा जोड़ों ने यज्ञ में प्रवेश किया, वहीं पंचांग पूजन, पित्त पूजन सहित अन्य क्रियाएं के अलावा नित्य हवन पूजन का आयोजन किया गया। उन्होंने बताया कि दुर्गा सप्तशती का पाठ 34 विप्रजनों के द्वारा किया जा रहा है। यहां पर नियमित रूप से शाम को भंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें नगरवासियों को भोजनप्रसादी के लिए अपील की है। वहीं यज्ञ की परिक्रमा का विशेष इंतजाम किया गया।

हवन पूजन का आयोजन किया गया


यज्ञाचार्य पंडित श्री शर्मा ने बताया कि सहस्त्र चंडी महायज्ञ से शत्रुओं पर विजय, धन, संपत्ति, सुख-समृद्धि, स्वास्थ्य, मानसिक शांति, और आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ दुष्ट शक्तियों से सुरक्षा मिलती है। जगदंबा की आराधना से सर्वार्थ सिद्धि भगवती की लीलाएं अनंत है। उन लीलाओं का श्रवण, नाम स्मरण तथा श्रद्धाभक्ति से पूजन से संपूर्ण मनोकामना पूर्ण होती है। उन्होंने कहा कि महाशक्ति ही परमब्रह्म के रूप में प्रतिष्ठित है, जो विभिन्न रूपों में अनेक लीलाएं करती रहती है। ये ही महाशक्ति नौ दुर्गाओं व दस महा विद्याओं के रूप में प्रतिष्ठित है। महायज्ञ में घी, अनाज, जड़ी-बूटियों और विशेष सामग्री को मंत्रों के साथ अग्नि में अर्पित किया जाता है। 

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