Drnewsindia / दिनांक: 4 जनवरी, 2026
भोपाल। झीलों की नगरी अब बदमाशों की चारागाह बनती जा रही है। राजधानी के बागसेवनिया थाना क्षेत्र में बदमाशों के हौसले इतने बुलंद हैं कि उन्होंने न केवल एक परिवार के घर में घुसकर जानलेवा हमला किया, बल्कि उनकी संपत्ति को भी आग के हवाले कर दिया। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस ने इस गंभीर वारदात को ‘मामूली मारपीट’ बताकर आरोपियों को थाने से ही छोड़ दिया, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
क्या है पूरा मामला?
घटना बागमुगालिया की क्षिप्रा कॉलोनी की है, जहाँ अखिलेश साहनी अपने परिवार के साथ रहते हैं। पीड़ित परिवार के अनुसार, इलाके के कुख्यात बदमाशों ने दिनदहाड़े उनके घर पर धावा बोला।
- बदमाशों की पहचान: पीड़ित ने अनुज, पवन, धर्मेंद्र, संदीप, भीम और उनके अन्य साथियों पर हमले का आरोप लगाया है।
- खूनी तांडव: बदमाशों ने अखिलेश साहनी पर डंडों और धारदार हथियारों से हमला किया, जिससे उनका पैर टूट गया। बीच-बचाव करने आई उनकी पत्नी सुमन साहनी के सिर पर डंडा मारकर उनका सिर फोड़ दिया गया।
- आगजनी और दहशत: हमले के बाद भी बदमाशों का मन नहीं भरा। रात के अंधेरे में आरोपियों ने पीड़ित के स्कूटर में आग लगा दी और पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी दी।
खाकी पर उठे सवाल: ‘सांठगांठ’ के गंभीर आरोप
इस पूरे मामले में बागसेवनिया पुलिस की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि पुलिस ने अपराधियों से हाथ मिला लिया है।
“बदमाशों ने हमें जान से मारने की कोशिश की, घर में तोड़फोड़ की और गाड़ी जला दी, लेकिन पुलिस ने इसे सामान्य मारपीट की धाराओं में दर्ज किया और आरोपियों को थाने से ही जमानत दे दी।” — पीड़ित परिवार
मुख्य बिंदु जो पुलिस की लापरवाही दर्शाते हैं:
- धाराओं के साथ खेल: जानलेवा हमले (307 IPC/प्रासंगिक धाराएं) के बावजूद मामूली चोटों की धाराओं में मामला दर्ज करना।
- आरोपियों की तुरंत रिहाई: गंभीर अपराध और आगजनी के बावजूद आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजने के बजाय थाने से छोड़ना।
- सुरक्षा का अभाव: खुलेआम धमकी मिलने के बाद भी पीड़ित परिवार को कोई सुरक्षा प्रदान नहीं की गई।




