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भोपाल। राजधानी का भोपाल हाट इन दिनों रंगों, स्वाद और आत्मनिर्भरता की खुशबू से महक रहा है। होली के उपलक्ष्य में आयोजित ‘आजीविका होली मेले’ में प्रदेश के 20 से अधिक जिलों की ग्रामीण महिलाएं (जीविका दीदियां) अपने हुनर का प्रदर्शन कर रही हैं। यहाँ न केवल मिलावट मुक्त खान-पान मिल रहा है, बल्कि मध्य प्रदेश की समृद्ध ग्रामीण संस्कृति के दर्शन भी एक ही छत के नीचे हो रहे हैं।
केमिकल को कहें ‘ना’: पलाश और चुकंदर से बना ऑर्गेनिक गुलाल
मेले में सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र बालाघाट की दीदियों द्वारा तैयार किया गया ऑर्गेनिक गुलाल है।
- कैसे बना: दीदियों ने बताया कि वे अरारोट और पलाश के फूलों के पाउडर का बेस तैयार करती हैं।
- प्राकृतिक रंग: लाल रंग के लिए चुकंदर, पीले के लिए हल्दी-बेसन और हरे रंग के लिए मोरिंगा (सहजन) का उपयोग किया गया है।
- फायदा: यह गुलाल त्वचा के लिए पूरी तरह सुरक्षित है और पर्यावरण को भी नुकसान नहीं पहुँचाता।
सेहत का खजाना: सीधी का महुआ और अनूपपुर का कोदो
खान-पान के शौकीनों के लिए यहाँ कुछ खास औषधीय उत्पाद भी उपलब्ध हैं:
- सीधी के महुआ लड्डू: दीदियों का दावा है कि ये लड्डू जोड़ों के दर्द और शारीरिक कमजोरी दूर करने में रामबाण हैं।
- अनूपपुर के कोदो बिस्किट: आयरन और फाइबर से भरपूर कोदो के बिस्किट सीधे किसानों से अनाज लेकर हाथों से तैयार किए गए हैं। इनमें किसी भी प्रकार के प्रिजर्वेटिव का उपयोग नहीं किया गया है।
इन जिलों की सहभागिता से सजा मेला
मेले में भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, भिंड, मुरैना, सीहोर, सागर, सीधी, बालाघाट, शहडोल, अनूपपुर, सिंगरौली, सतना, दमोह, छतरपुर, निवाड़ी, धार, झाबुआ, मंदसौर, खरगोन, बैतूल, विदिशा और बुरहानपुर की दीदियां अपने हैंडलूम और फूड प्रोडक्ट्स के साथ शामिल हुई हैं।
ग्राहकों का भरोसा: “यहाँ मिलावट का डर नहीं”
मेले में खरीदारी करने पहुँचे धर्मेंद्र सेठ ने बताया, “आज के समय में शुद्ध खोया और मसाले मिलना मुश्किल है, लेकिन यहाँ आजीविका समूहों की बहनों द्वारा बनाए गए सामान पर पूरा भरोसा है। यहाँ की गुजिया का स्वाद घर जैसा है।”
संपादकीय नोट: यह मेला केवल व्यापार का माध्यम नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण का उत्सव है। अगर आप भी अपनों की सेहत और पर्यावरण का ख्याल रखना चाहते हैं, तो इस होली ‘आजीविका मार्ट’ के उत्पादों को जरूर अपनाएं।




