मंत्रियों के दिशा-निर्देशों पर अमल नहीं कर रहे अफसर

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भाजपा मुख्यालय की नई व्यवस्था औपचारिकता बनकर रह गई, कार्यकर्ताओं में नाराजगी

Drnewsindia.com/भोपाल। मध्य प्रदेश में भाजपा कार्यकर्ताओं की समस्याओं की सुनवाई और समाधान के लिए शुरू की गई सत्ता और संगठन के समन्वय वाली व्यवस्था अब सवालों के घेरे में है। भाजपा प्रदेश मुख्यालय में सप्ताह में पांच दिन मंत्रियों के बैठने का जो नवाचार किया गया था, वह धीरे-धीरे औपचारिकता बनकर रह गया है। इसकी बड़ी वजह यह सामने आ रही है कि मंत्रियों द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों पर कई अफसर अमल नहीं कर रहे हैं।

कार्यकर्ताओं ने भाजपा मुख्यालय से मोड़ा मुंह

इस व्यवस्था के तहत कार्यकर्ताओं की समस्याओं का त्वरित निराकरण होना था, लेकिन अफसरों की उदासीनता के चलते अब कार्यकर्ताओं ने भाजपा मुख्यालय पहुंचना कम कर दिया है। कार्यकर्ता अब फिर से स्थानीय स्तर पर अपने विधायक या मंत्रियों के माध्यम से समाधान की कोशिश कर रहे हैं।

हेमंत खंडेलवाल के अध्यक्ष बनने के बाद हुई थी शुरुआत

गौरतलब है कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद हेमंत खंडेलवाल ने कार्यकर्ताओं को महत्व देते हुए यह व्यवस्था लागू कराई थी। इसके तहत तय किया गया था कि राज्य सरकार के मंत्री सप्ताह में पांच दिन भाजपा कार्यालय में दो घंटे बैठेंगे।
इस दौरान एक कैबिनेट मंत्री और एक राज्य मंत्री अलग-अलग कक्षों में बैठकर प्रदेशभर से आने वाले कार्यकर्ताओं की समस्याएं सुनेंगे और त्वरित समाधान करेंगे।

अफसरों को लिखी गई टीप हो रही नजरअंदाज

व्यवस्था के अनुसार, जिन मामलों का तुरंत समाधान संभव नहीं होता, उनमें संबंधित अधिकारियों को मंत्रियों द्वारा टीप लिखकर निर्देश दिए जाते थे। लेकिन सूत्रों का कहना है कि कई अधिकारी इन निर्देशों को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। इससे कार्यकर्ता परेशान हो रहे हैं और उन्हें बार-बार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

पहले सप्ताह दिखा असर, फिर ठंडा पड़ा प्रयोग

जानकारों के अनुसार, शुरुआती सप्ताह में इस व्यवस्था का सकारात्मक असर दिखा था। बड़ी संख्या में कार्यकर्ता भाजपा मुख्यालय पहुंचे और उनकी समस्याओं का समाधान भी हुआ। लेकिन धीरे-धीरे अफसरों की निष्क्रियता के चलते यह प्रयोग दम तोड़ता नजर आने लगा।

स्थानीय नेताओं के पास जाने को मजबूर कार्यकर्ता

कार्यकर्ताओं का कहना है कि वे खर्च कर भोपाल पहुंचते हैं, लेकिन समस्याओं का पूरा समाधान नहीं मिल पाता। इसी कारण वे अब अपने क्षेत्र के विधायक या मंत्री के निवास पर जाकर समाधान की गुहार लगाने लगे हैं।

विधायक बोले– बिना स्थानीय समन्वय के सफल नहीं होगी व्यवस्था

भाजपा के एक विधायक ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि जब तक मंत्रियों द्वारा स्थानीय विधायकों को विश्वास में लेकर काम नहीं किया जाएगा, तब तक इस तरह के प्रयोग सफल नहीं हो सकते। विधायक ही जमीनी हकीकत से अवगत होते हैं और वे मंत्रियों को वास्तविक स्थिति बताकर समस्याओं का समाधान करा सकते हैं।

संगठन हुआ सक्रिय, फिर से जानकारी पहुंचाने की तैयारी

कार्यकर्ताओं की कम होती संख्या को देखते हुए प्रदेश संगठन सक्रिय हो गया है। अब जिला संगठनों के माध्यम से कार्यकर्ताओं तक इस नई व्यवस्था की जानकारी फिर से पहुंचाने की योजना बनाई जा रही है।
बैठकों और कार्यक्रमों में पार्टी नेता कार्यकर्ताओं और आम जनता को इस व्यवस्था के बारे में अवगत कराएंगे। साथ ही जिला स्तर पर भी प्रभारी मंत्री या स्थानीय मंत्री की मौजूदगी में इसी तरह की बैठक व्यवस्था शुरू करने की तैयारी है।

अफसरों की कार्यप्रणाली की होगी जांच

सूत्रों के मुताबिक, मंत्रियों ने अब यह जानकारी जुटाना शुरू कर दिया है कि उनके द्वारा लिखी गई टीप पर अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की। यदि यह पाया गया कि निर्देशों की अनदेखी की गई है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
संगठन ने मंत्रियों से कहा है कि वे अफसरों की कार्यप्रणाली पर लगातार नजर रखें और लापरवाही मिलने पर सख्त कदम उठाएं।


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