मध्यप्रदेश: ‘देश का नया फूड बास्केट’ बनने की गौरवशाली यात्रा

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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का संकल्प: “2026 – किसान कल्याण एवं कृषि उद्योग विकास वर्ष”

भोपाल / मध्यप्रदेश आज कृषि के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक परिवर्तन का साक्षी बन रहा है। कभी सिंचाई और बिजली के अभाव से जूझने वाला यह राज्य आज देश के अग्रणी कृषि राज्यों की पहली पंक्ति में खड़ा है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में प्रदेश सरकार “बीज से बाजार तक” किसानों का संबल बनी हुई है।


📊 मध्यप्रदेश: कृषि उपलब्धियों के शिखर पर

मध्यप्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कृषि है। वर्तमान में प्रदेश की कुछ प्रमुख राष्ट्रीय उपलब्धियां इस प्रकार हैं:

  • खाद्यान्न उत्पादन: देश में द्वितीय स्थान।
  • श्रीअन्न (मिलेट्स): उत्पादन में देश में दूसरा स्थान।
  • कृषि कर्मण पुरस्कार: लगातार 7 बार विजेता।
  • नंबर 1 उत्पादन: संतरा, मसाले, लहसुन, अदरक और धनिया में देश में शीर्ष पर।
  • नंबर 2 उत्पादन: मटर, प्याज, मिर्च और अमरूद में।
  • दलहन-तिलहन: उत्पादन में देश का अग्रणी राज्य।

🌊 सिंचाई क्रांति: 7 लाख से 100 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य

प्रदेश में सिंचाई की क्षमता में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है:

  1. अतीत: कभी मात्र 7 लाख हेक्टेयर में सिंचाई होती थी।
  2. वर्तमान: आज करीब 65 लाख हेक्टेयर रकबा सिंचित है।
  3. लक्ष्य: वर्ष 2028-29 तक इसे 100 लाख हेक्टेयर तक ले जाने का संकल्प।
  4. प्रमुख प्रोजेक्ट्स: केन-बेतवा, पार्वती-कालीसिंध-चंबल लिंक परियोजना और ताप्ती बेसिन ग्राउंड वाटर रिचार्ज प्रोजेक्ट।

💡 किसान हितैषी बड़े निर्णय (Key Initiatives)

योजना / पहलमुख्य लाभ
किसान कल्याण वर्ष 2026रोजगार आधारित कृषि उद्योगों और किसानों की आय बढ़ाने पर केंद्रित।
रानी दुर्गावती श्रीअन्न योजनाकोदो-कुटकी का ₹3500/क्विंटल तक उपार्जन और प्रोत्साहन।
ऊर्जा क्रांतिमात्र ₹5 में स्थायी बिजली कनेक्शन और सोलर पंपों पर जोर।
0% ब्याज ऋणसहकारी बैंकों के माध्यम से फसल ऋण की सुविधा निरंतर।
दाल मिशन2030-31 तक 350 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य।

🌱 भविष्य की राह: अन्नदाता से ऊर्जादाता

सरकार अब पारंपरिक खेती के बजाय वैज्ञानिक और उन्नत पद्धति पर जोर दे रही है:

  • वैल्यू एडिशन: फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स के माध्यम से किसानों को उद्यमी बनाना।
  • अनुसंधान: 48 करोड़ की लागत से 6 नए वन विज्ञान केंद्रों की स्थापना।
  • पर्यावरण अनुकूल: जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देना।

“जब हमारा अन्नदाता सशक्त होगा, तभी मध्यप्रदेश विकसित और समृद्ध होगा। हम किसानों को केवल खेती तक सीमित नहीं रखना चाहते, उन्हें ‘ऊर्जादाता’ और ‘उद्यमी’ बनाना हमारा लक्ष्य है।”

— डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री, मध्यप्रदेश

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