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उज्जैन | 03 अप्रैल, 2026 अवंतिका की पावन नगरी उज्जैन एक बार फिर विश्व के मानचित्र पर ‘काल गणना’ के केंद्र के रूप में उभर रही है। अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ के शुभारंभ पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने उज्जैन की वैज्ञानिक विरासत को पुनर्जीवित करने का शंखनाद किया।
प्रमुख घोषणाएं और बड़े कदम:
- उज्जैन साइंस सेंटर का लोकार्पण: 15 करोड़ रुपये की लागत से बने अत्याधुनिक विज्ञान केंद्र और तारामंडल की शुरुआत।
- MST (महाकाल स्टैंडर्ड टाइम): केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ग्रीनविच (GMT) के स्थान पर उज्जैन आधारित ‘महाकाल स्टैंडर्ड टाइम’ की तार्किक स्थापना का आह्वान किया।
- डोंगला (Dongla): अब भूमध्य रेखा और कर्क रेखा का कटाव बिंदु उज्जैन से 32 किमी दूर डोंगला में शिफ्ट हो गया है, जिसे एस्ट्रोनॉमिकल स्टडीज के बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
- सिंहस्थ 2028 की तैयारी: 725 करोड़ रुपये के विकास कार्यों का भूमि-पूजन, जिसमें 4-लेन बायपास और ‘सम्राट विक्रमादित्य-द हेरिटेज’ प्रोजेक्ट शामिल है।
उज्जैन: जहाँ विज्ञान और आध्यात्म का मिलन होता है
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जब पश्चिम को खगोल शास्त्र का ज्ञान भी नहीं था, तब उज्जैन के विद्वान नक्षत्रों की सटीक गणना कर रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि शून्य देशांतर रेखा (Prime Meridian) सदियों पहले उज्जैन से होकर गुजरती थी।
“शिव उस अनंत का प्रतीक हैं जहाँ समय जन्म लेता है और अंत होता है, इसीलिए वे ‘मास्टर ऑफ टाइम’ हैं। विज्ञान और शास्त्रों का यह सत्य उज्जैन की माटी में रचा-बसा है।” — डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री

प्रदर्शनी के मुख्य आकर्षण:
सम्मेलन में आयोजित विज्ञान प्रदर्शनी में परंपरा और भविष्य की तकनीक का अद्भुत समन्वय दिखा:
- रोबोटिक आर्म: मंदिर की आरती के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई।
- ड्रोन तकनीक: मेडिकल, एग्री और एयर टैक्सी ड्रोन का प्रदर्शन।
- इसरो (ISRO) के मॉडल: मंगलयान, चंद्रयान और ASLV के मॉडल्स ने छात्रों को प्रेरित किया।
- सैटेलाइट मेकिंग: 120 विद्यार्थियों ने नैनो सैटेलाइट बनाने की बारीकियां सीखीं।
शिक्षा और भविष्य का विजन
केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 पर जोर देते हुए कहा कि शिक्षा को रटने से निकालकर एआई (AI) और क्रिटिकल थिंकिंग की ओर ले जाना होगा। उन्होंने ‘विद्यार्थी विज्ञान मंथन’ की वेबसाइट और पुस्तिका का विमोचन भी किया।
विशेषज्ञों की राय:
- डॉ. वी.के. सारस्वत (नीति आयोग): वैदिक ज्ञान और आधुनिक विज्ञान का समन्वय ‘विकसित भारत@2047’ के लिए अनिवार्य है।
- श्री सुरेश सोनी (चिंतक): भारतीय कालगणना ऋतु चक्र और प्रकृति के नियमों पर आधारित सबसे सटीक पद्धति है।
निष्कर्ष: विकसित भारत की ओर कदम
‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ सम्मेलन का उद्देश्य केवल अतीत का गौरव गान नहीं, बल्कि भविष्य की ‘स्पेस इकोनॉमी’ में भारत की हिस्सेदारी सुनिश्चित करना है। सिंहस्थ 2028 तक उज्जैन न केवल आस्था का, बल्कि वैश्विक विज्ञान और काल गणना का भी सबसे बड़ा केंद्र बनकर उभरेगा।




