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लखनऊ। अपनी कॉमेडी और मंझे हुए अभिनय से दशकों तक दर्शकों को गुदगुदाने वाले दिग्गज अभिनेता राकेश बेदी इन दिनों अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘धुरंधर: द रिवेंज’ की सफलता का आनंद ले रहे हैं। हाल ही में लखनऊ में आयोजित ‘भारतेंदु नाट्य अकादमी’ (BNA) के स्वर्ण जयंती समारोह में अपने मशहूर एकल नाटक ‘मसाज’ के मंचन के लिए आए राकेश बेदी ने रंगमंच के प्रति अपनी अटूट निष्ठा जाहिर की।
रंगमंच मेरे खून में है: राकेश बेदी
इंटरव्यू के दौरान उन्होंने बताया कि थिएटर उनके जीवन का अभिन्न अंग है। उन्होंने एक दिलचस्प खुलासा करते हुए कहा, “जब मैं फिल्म ‘धुरंधर’ साइन कर रहा था, तब मैंने निर्देशक आदित्य धर के सामने एक ही शर्त रखी थी—मुझे नाटकों के रिहर्सल और मंचन के लिए समय चाहिए होगा। निर्देशक ने मेरी इस शर्त को सहर्ष स्वीकार कर लिया।”
50 साल का करियर और थिएटर का साथ
राकेश बेदी ने 1976 में FTII (पुणे) से स्नातक किया था। उन्होंने गर्व से बताया कि पिछले 50 वर्षों में शायद ही कोई ऐसा महीना बीता हो, जब उन्होंने स्टेज पर परफॉर्म न किया हो। उन्होंने कहा कि फिल्मों और टीवी की चकाचौंध के बीच थिएटर ही वह माध्यम है जो दर्शकों के साथ सीधा और व्यक्तिगत जुड़ाव महसूस कराता है।
‘धुरंधर’ की सफलता और सोशल मीडिया का असर
फिल्म में पाकिस्तानी नेता ‘जमील जमाली’ का सशक्त किरदार निभाने वाले बेदी ने फिल्म की सफलता पर अपने विचार साझा किए:
- वक्त का तकाजा: उन्होंने कहा कि अगर ‘धुरंधर’ या इसका सीक्वल 10 साल पहले आता, तो शायद इतनी बड़ी हिट न होता। आज देश का माहौल और तकनीक बदल चुकी है।
- सोशल मीडिया की ताकत: बेदी के अनुसार, आज सोशल मीडिया की वजह से दर्शकों की प्रतिक्रिया तुरंत (Instant) वायरल होती है, जिसने फिल्म को ₹1650 करोड़ के जादुई आंकड़े तक पहुँचाने में मदद की।
- किरदार की चर्चा: फिल्म में उनके द्वारा निभाया गया ‘जमील जमाली’ का किरदार इतना जीवंत है कि इसकी तुलना पाकिस्तान के चर्चित नेताओं (जैसे नबील गबोल) से की जा रही है।
लखनऊ: कला और संस्कृति का शहर
लखनऊ की तारीफ करते हुए अभिनेता ने कहा कि यहाँ आकर मंचन करना हमेशा सुखद होता है। यह शहर कवियों, लेखकों और गायकों की भूमि है और यहाँ के दर्शक कला की गहरी समझ रखते हैं।
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