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रायसेन। शहर के ऐतिहासिक सेंट फ्रांसिस चर्च में बुधवार की मध्यरात्रि प्रभु यीशु मसीह का जन्मोत्सव अपार श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। रात के ठीक 12 बजते ही चर्च की घंटियां गूंज उठीं और समूचा परिसर ‘मैरी क्रिसमस’ के जयघोष से सराबोर हो गया।

रोशनी से नहाया चर्च, आकर्षण का केंद्र बनी झांकी
क्रिसमस के उपलक्ष्य में चर्च को दुल्हन की तरह सजाया गया था। इस वर्ष के मुख्य आकर्षण रहे:
- आकर्षक गोशाला (क्रीप): प्रभु यीशु की जन्मस्थली को दर्शाती सुंदर झांकी ने सबका मन मोह लिया।
- विशाल क्रिसमस ट्री: परिसर में स्थापित 30 फीट से ऊंचा क्रिसमस ट्री और रंगीन रोशनी धर्मावलंबियों के लिए सेल्फी पॉइंट बना रहा।

विशेष प्रार्थना और केक से उत्सव की शुरुआत
फादर अभिलाष के नेतृत्व में आधी रात को विशेष मिस्सा (प्रार्थना) का आयोजन किया गया। प्रार्थना के पश्चात:
- समाज के लोगों ने केक काटकर खुशियां बांटीं।
- क्रिसमस कैरल्स (धार्मिक गीत) गाए गए और समाजजनों ने उल्लास में नृत्य किया।
- एक-दूसरे को गले मिलकर शांति और प्रेम की बधाई दी गई।
“क्रिसमस मन की आंतरिक तैयारी का पर्व है” – फादर अभिलाष
फादर अभिलाष ने मानवता के नाम एक गहरा संदेश देते हुए कहा:
“क्रिसमस केवल बाहरी साज-सज्जा का नाम नहीं है, बल्कि यह भीतर की शुद्धि का पर्व है। इसकी तैयारी हम 1 दिसंबर से ही शुरू कर देते हैं ताकि हमारे व्यवहार में सकारात्मक बदलाव आए। ईश्वर का संदेश सरल है— प्रेम, सेवा और करुणा।”
पूरी मानवता के लिए आशा का संदेश
उन्होंने बाइबिल का उल्लेख करते हुए बताया कि यीशु का जन्म पूरी सृष्टि के लिए सुकून की खबर है। स्वर्गदूतों का वह संदेश— ‘डरो मत, मैं खुशखबरी लाया हूँ’— आज के अशांत दौर में भी उतना ही प्रासंगिक है। ईश्वर का प्रेम हर इंसान के लिए है और यही एहसास हमें आनंदित बनाता है।




