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रायसेन। जिले के आधा दर्जन गांवों के हजारों ग्रामीणों का धैर्य बुधवार को जवाब दे गया। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) के तहत स्वीकृत होने के बावजूद करीब 8 किलोमीटर लंबी सड़क का निर्माण शुरू न होने से नाराज ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट का घेराव किया और जल्द काम शुरू कराने की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा।
मंजूरी मिली, ठेका हुआ, पर काम ‘शून्य’
ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों को बताया कि रायसेन-विदिशा मुख्य मार्ग से ग्राम सालेरा तक की यह सड़क (लंबाई 8.192 किमी) 12 अप्रैल 2023 को ही स्वीकृत हो चुकी है।
- पैकेज नंबर: एमपी-2930
- ठेकेदार: मेसर्स राय कंस्ट्रक्शन, चांदना (अखिलेश राय)
- विवाद: अनुबंध हुए लंबा समय बीत चुका है, लेकिन मौके पर एक ईंट भी नहीं रखी गई।
7 गांवों की ‘लाइफलाइन’ हुई जर्जर
यह मार्ग केवल एक सड़क नहीं, बल्कि आधा दर्जन से अधिक गांवों के लिए जिला मुख्यालय पहुंचने का एकमात्र जरिया है।
- प्रभावित गांव: मउपथरई, सूंड, अजायबनगर, सालेरा, घाटपिपलिया, हिम्मतगढ़, चांदना और मुरा मुंगावली।
- बदहाली का आलम: डामर पूरी तरह उखड़ चुका है, सड़क गहरे गड्ढों में तब्दील हो गई है। धूल के गुबार से लोग बीमार हो रहे हैं और मरीजों को अस्पताल ले जाना किसी चुनौती से कम नहीं है।
- छात्रों की परेशानी: स्कूल-कॉलेज जाने वाले छात्र-छात्राओं को रोजाना इस पथरीले और ऊबड़-खाबड़ रास्ते से जूझना पड़ रहा है।
ग्रामीणों की चेतावनी: “2028 का इंतजार नहीं करेंगे”
हालांकि ठेके की समय-सीमा अप्रैल 2028 तक है, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि काम शुरू करने में हो रही देरी ठेकेदार की घोर लापरवाही को दर्शाती है। उन्होंने मांग की है कि:
- सड़क का निर्माण कार्य तत्काल प्रभाव से शुरू किया जाए।
- लापरवाह ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
- निर्माण कार्य की गुणवत्ता की प्रशासनिक निगरानी हो।
प्रशासन का पक्ष: ज्ञापन लेने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों ने ग्रामीणों को आश्वासन दिया है कि PMGSY विभाग के इंजीनियरों से रिपोर्ट तलब की जाएगी और निर्माण कार्य जल्द शुरू कराया जाएगा।
Highlights: क्यों गुस्से में हैं ग्रामीण?
- दूरी: 8.192 किलोमीटर का अहम संपर्क मार्ग।
- देरी: अप्रैल 2023 से अब तक काम शुरू नहीं हुआ।
- समस्या: जर्जर सड़क के कारण इमरजेंसी में एंबुलेंस पहुंचने में भी होती है देरी।
- मांग: ठेकेदार पर कार्रवाई और सड़क का निर्माण।




