रायसेन: 25 फीट ऊंचाई पर बकरे की परिक्रमा और ‘वीर’ बनने के लिए कोड़ों की मार, 100 साल पुरानी है ये अनूठी परंपरा

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वनगवां (रायसेन) | 05 मार्च, 2026

रायसेन / मध्य प्रदेश के रायसेन जिले का वनगवां गांव अपनी एक ऐसी परंपरा के लिए जाना जाता है, जिसे देखकर बाहरी लोग दांतों तले उंगली दबा लेते हैं। होली के अवसर पर यहाँ ‘वीर बम बोल’ की सदियों पुरानी प्रथा निभाई गई, जहाँ आस्था, साहस और वीरता का अद्भुत संगम देखने को मिला।

🚩 मेघनाथ बाबा की पूजा और 25 फीट की ऊंचाई पर परिक्रमा

धुलेंडी की शाम जैसे ही 6 बजते हैं, पूरा गांव मेघनाथ बाबा (जिन्हें स्थानीय लोग ‘वीर बब्बों’ कहते हैं) की विशेष पूजा-अर्चना में जुट जाता है।

  • अनोखी रस्म: पूजा स्थल पर लगे दो लोहे के खंभों पर, जमीन से लगभग 25 फीट की ऊंचाई पर एक जीवित बकरे को बांधकर घुमाया जाता है।
  • मान्यता: ग्रामीणों का मानना है कि ऐसा करने से गांव पर आने वाली विपत्तियां टल जाती हैं और मेघनाथ बाबा का आशीर्वाद बना रहता है।

⚔️ कोड़ों की मार से होती है ‘वीरों’ की पहचान

इस आयोजन का सबसे रोमांचक और हैरान करने वाला हिस्सा है युवाओं को कोड़े मारना

  • परंपरा का उद्देश्य: यह प्रथा उन युवाओं की पहचान के लिए शुरू की गई थी जो गांव और समाज की रक्षा करने का दम रखते हैं।
  • हैरान करने वाला तथ्य: युवाओं को कोड़े मारकर उनकी वीरता का एहसास कराया जाता है। आश्चर्य की बात यह है कि कोड़े खाने वाले युवाओं को न तो कोई शारीरिक नुकसान होता है और न ही उनके शरीर पर चोट के निशान मिलते हैं। इसे बाबा मेघनाथ का चमत्कार माना जाता है।

🕰️ 100 वर्षों से हलारिया परिवार संभाल रहा है कमान

वनगवां के जनपद सदस्य नितेश पटेल और पूर्व सरपंच मुन्नालाल गौर के अनुसार, यह परंपरा 100 से अधिक वर्षों से अनवरत चली आ रही है।

  • आयोजक: इस कार्यक्रम की जिम्मेदारी हलारिया कुर्मी पटेल परिवार निभाता आ रहा है, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी मेघनाथ बाबा की सेवा कर रहे हैं।
  • गणमान्य उपस्थिति: इस वर्ष आयोजन में अखिल भारतीय कुर्मी महासभा के जिला अध्यक्ष सीएल गौर सहित कई वरिष्ठ जन और ग्रामीण मौजूद रहे।

📍 आसपास के 10 गांवों का केंद्र बना वनगवां

यह अनूठी परंपरा अब केवल वनगवां की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की पहचान बन चुकी है। इस साल भी आसपास के करीब 10 गांवों से बड़ी संख्या में लोग इस हैरतअंगेज नजारे को देखने पहुंचे।

“यह केवल एक रस्म नहीं, हमारी संस्कृति और पूर्वजों की वीरता का प्रतीक है।”ग्रामीणों का स्वर

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