भोपाल।drnewsindia
रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय, भोपाल एवं विश्वरंग फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में श्रीलंका के प्रसिद्ध कलाकारों द्वारा प्रस्तुत नृत्य-नाटिका “रावणेश्वर” का भव्य आयोजन हुआ। यह प्रस्तुति न केवल भारतीय पौराणिक परंपरा के जीवंत चित्रण का उदाहरण बनी, बल्कि भारत-श्रीलंका के बीच सांस्कृतिक संवाद का सेतु भी बनी।
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री संतोष चौबे, श्रीलंका की डॉ. अमिला दमयंती (विभागाध्यक्ष, नृत्य एवं नाट्य संकाय, इंडियन एंड एशियन डांस विभाग), कुलगुरु प्रो. रवि प्रकाश दुबे, एस.जी.एस.यू. के कुलगुरु डॉ. विजय सिंह, प्रति-कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता एवं कुलसचिव डॉ. संगीता जौहरी विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कथा और थीम
‘रावणेश्वर’ श्रीलंका की रामायण परंपरा पर आधारित एक नृत्य-नाटिका है, जिसमें रावण को एक शिवभक्त, संगीतज्ञ और असाधारण प्रतिभा के धनी के रूप में दिखाया गया है। कथा के प्रवाह में उसका अहंकार, लालसा और पतन का भावपूर्ण चित्रण किया गया, जिससे दर्शकों ने रावण के मानवीय और आध्यात्मिक दोनों पक्षों को महसूस किया।
नृत्य, संगीत और मंचन

55 मिनट की इस नाटिका में श्रीलंका की तीन पारंपरिक नृत्य शैलियों — कैंडियन डांस, लो कंट्री डांस और सबरगमो डांस — का अद्भुत संगम देखने को मिला। कलाकारों ने अपनी भाव-भंगिमाओं, मुखौटों, वेशभूषा, संगीत और प्रकाश प्रभावों से कथा को जीवंत बना दिया। मंच पर रावण, सीता, मंदोदरी, शिव और अन्य पात्रों के संवाद-नृत्य दृश्यों ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया।
सांस्कृतिक संदेश

डॉ. अमिला दमयंती ने बताया कि ‘रावणेश्वर’ को उन्होंने वर्ष 2019 में कुम्भ मेले के लिए तैयार किया था। यह नाटक शक्ति और महानता के साथ-साथ आत्म-नियंत्रण और मर्यादा के महत्व को रेखांकित करता है। इसमें श्रीलंका की लोककथाओं, तमिल परंपराओं (खंब रामायण) और रावण से जुड़ी विविध मान्यताओं का समावेश किया गया है।
डॉ. दमयंती ने अपनी पीएच.डी. भारत और श्रीलंका की रामलीला पर तुलनात्मक अध्ययन विषय पर की है। उसी शोध से प्रेरित होकर उन्होंने इस नाट्यकृति की रचना की, जिसमें कुल 22 पात्रों को मंच पर सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया।
कलाकार और निर्देशन

मुख्य भूमिकाओं में —
इसरु रुषान (शिव), लहिरु रोशन (रावण, कोरियोग्राफी), यसित जीवन (राम), गयांदी (सीता), हिरुनी (मंदोदरी), इमाल्खा (सुपर्णखा), तरुष (लक्ष्मण) और सचिन (जटायु) शामिल रहे।
बैकग्राउंड कलाकारों में बिनुरे, अखिल, दिलशान, नियमित, प्रभा, तोषानी, चमुदी, संथाली, भवंति, कालिंदी और निमतरा शामिल थे।
बैकस्टेज टीम: इशामा (कत्थक), चमीर लक्षान (लाइट एंड ट्रैक)।
निर्देशन एवं लेखन: डॉ. अमिला दमयंती।
पूर्व प्रदर्शन

इससे पूर्व श्रीलंकाई कलाकारों ने 17 से 20 अक्टूबर 2025 तक अयोध्या में उत्तर प्रदेश सरकार के संस्कृति विभाग के आमंत्रण पर “रावणेश्वर” का मंचन किया था, जो दीपोत्सव 2025 का प्रमुख आकर्षण रहा। इसके उपरांत यह प्रस्तुति मध्य प्रदेश में रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय एवं विश्वरंग फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई।
समापन
कार्यक्रम में श्री संतोष चौबे ने कहा —
“यह आयोजन भारत और श्रीलंका के बीच सांस्कृतिक संवाद और सौहार्द को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह नृत्य नाट्य प्रस्तुति दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक जड़ों को उजागर करती है और दर्शकों को पौराणिक कथाओं की गहराई से रूबरू कराती है।”





