Drnewsindia.comनई दिल्ली | 15 जनवरी 2026
राष्ट्रमंडल देशों के लोकसभा अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद भवन परिसर स्थित संविधान सदन के सेंट्रल हॉल में अपना संबोधन दिया। इस दौरान उन्होंने भारत की लोकतांत्रिक यात्रा, विकास की उपलब्धियों और ग्लोबल साउथ में भारत की भूमिका पर विस्तार से बात की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जिस स्थान पर यह सम्मेलन हो रहा है, वह भारत की लोकतांत्रिक यात्रा का ऐतिहासिक केंद्र रहा है। आज़ादी से पहले यहीं संविधान सभा की बैठकें हुई थीं और आज़ादी के बाद 75 वर्षों तक यही भारत की संसद रही। अब इस भवन को “संविधान सदन” का नाम दिया गया है, जो लोकतंत्र को समर्पित एक जीवंत प्रतीक है।
लोकतंत्र की ताकत बना भारत की विविधता
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज़ादी के समय यह आशंका जताई जाती थी कि इतनी विविधता वाला देश लोकतंत्र को संभाल नहीं पाएगा, लेकिन भारत ने विविधता को अपनी ताकत बना लिया। उन्होंने कहा कि भारत ने यह साबित किया है कि लोकतांत्रिक संस्थाएं और प्रक्रियाएं न केवल स्थिरता देती हैं, बल्कि विकास की गति और पैमाना भी बढ़ाती हैं।
उन्होंने भारत की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है।
- UPI दुनिया का सबसे बड़ा डिजिटल पेमेंट सिस्टम है।
- भारत दुनिया का सबसे बड़ा वैक्सीन उत्पादक है।
- स्टील उत्पादन में भारत दूसरे स्थान पर है।
- भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम दुनिया में तीसरे नंबर पर है।
- एविएशन मार्केट और मेट्रो नेटवर्क में भी भारत शीर्ष देशों में शामिल है।
- दूध उत्पादन में भारत पहले स्थान पर है।
प्रधानमंत्री ने कहा, “भारत में डेमोक्रेसी का अर्थ है—लास्ट माइल डिलीवरी।” सरकार हर व्यक्ति तक बिना भेदभाव के योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए काम कर रही है। इसी का परिणाम है कि बीते कुछ वर्षों में करीब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं।
जनता सर्वोपरि, टेक्नोलॉजी बनी लोकतंत्र की साथी
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत में जनता सर्वोपरि है। जनता की आकांक्षाओं को प्राथमिकता देते हुए प्रक्रिया से लेकर तकनीक तक हर चीज को लोकतांत्रिक बनाया गया है। कोरोना काल का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि संकट के बावजूद भारत ने 150 से ज्यादा देशों को दवाइयां और वैक्सीन भेजीं।
उन्होंने कहा कि कॉमनवेल्थ की कुल आबादी का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा भारत में रहता है और भारत सभी देशों के विकास में योगदान देने के लिए प्रतिबद्ध है। स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन, आर्थिक विकास और नवाचार जैसे क्षेत्रों में भारत अपने दायित्व पूरी जिम्मेदारी से निभा रहा है।
ग्लोबल साउथ की आवाज बना भारत
प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया बड़े बदलाव के दौर से गुजर रही है और यह ग्लोबल साउथ के लिए नए रास्ते बनाने का समय है। भारत हर वैश्विक मंच पर ग्लोबल साउथ के हितों को मजबूती से उठा रहा है। G20 अध्यक्षता के दौरान भी भारत ने ग्लोबल साउथ की चिंताओं को वैश्विक एजेंडे के केंद्र में रखा।
उन्होंने बताया कि भारत ओपन सोर्स टेक प्लेटफॉर्म विकसित कर रहा है ताकि ग्लोबल साउथ के देश भी भारत जैसी व्यवस्थाएं अपने यहां लागू कर सकें।
संसद को आम लोगों से जोड़ने पर ज़ोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि इस सम्मेलन का एक बड़ा उद्देश्य संसदीय लोकतंत्र की समझ को और गहरा करना है। भारत की संसद पहले से ही स्टडी टूर, ट्रेनिंग प्रोग्राम और इंटर्नशिप के जरिए लोगों को संसद से जोड़ रही है।
उन्होंने बताया कि अब संसद में AI की मदद से बहसों और कार्यवाहियों का रियल टाइम में क्षेत्रीय भाषाओं में अनुवाद किया जा रहा है। इससे युवा पीढ़ी को संसद को समझने में और आसानी होगी।
सीखने–सिखाने की परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान
प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्हें अब तक कॉमनवेल्थ से जुड़े 20 से अधिक देशों में जाने और कई संसदों को संबोधित करने का अवसर मिला है। वहां से मिली अच्छी प्रथाओं को वे भारत की संसद के नेतृत्व के साथ साझा करते रहे हैं।
उन्होंने विश्वास जताया कि यह सम्मेलन सीखने और सिखाने की इस परंपरा को और समृद्ध करेगा और अंत में सभी प्रतिनिधियों को शुभकामनाएं दीं।




