विदाई की बेला: “कागजों पर रिटायर हुए हैं डॉ. चतुर्वेदी, लोगों के दिलों में हमेशा रहेंगे बसे”

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सीहोर / Drnewsindia

सीहोर जिला अस्पताल के वरिष्ठ और लोकप्रिय चिकित्सक डॉ. बीके चतुर्वेदी की सेवानिवृत्ति पर शहरवासियों और स्वास्थ्य विभाग के अमले ने उन्हें भावभीनी विदाई दी। उनके निजी निवास पर आयोजित इस भव्य समारोह में शहर के गणमान्य नागरिकों, सहकर्मियों और मरीजों ने हिस्सा लिया, जो डॉ. चतुर्वेदी के प्रति उनके अटूट स्नेह को दर्शाता है।

“नर सेवा ही नारायण सेवा”: डॉ. चतुर्वेदी का संकल्प

सम्मान से गदगद डॉ. चतुर्वेदी ने अपने संबोधन में भावुक होते हुए कहा, “मैं जिला अस्पताल की सेवा से सेवानिवृत्त हुआ हूँ, आप लोगों के मन से नहीं। अस्पताल में पदस्थ रहने के दौरान यहाँ की जनता और स्टाफ का जो भरपूर सहयोग मिला, उसे मैं कभी नहीं भूल सकता।”

उन्होंने आगे कहा कि उन्होंने हमेशा मरीज को भगवान माना है। उनके अनुसार, “नर सेवा ही नारायण सेवा” ही उनके जीवन का मूलमंत्र रहा है और वे अपनी अंतिम सांस तक मानव सेवा जारी रखेंगे।

सम्मान और विचार: सेवा को किया गया नमन

कार्यक्रम की शुरुआत माँ सरस्वती के पूजन के साथ हुई। इस अवसर पर अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों ने डॉ. चतुर्वेदी को तिलक लगाकर, माल्यार्पण कर और शॉल-श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया।

  • संस्कार मंच का सम्मान: संस्कार मंच की ओर से मनोज दीक्षित ‘मामा’ ने डॉ. साहब का स्वागत किया।
  • भावुक उद्बोधन: श्री दीक्षित ने कहा कि डॉ. चतुर्वेदी किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। उन्होंने अपना घर-परिवार छोड़कर शहर की जनता की सेवा की है। उनकी विदाई केवल कागजी है, क्योंकि वे शहर के हर नागरिक के हृदय में बसे हैं, जहाँ से विदाई संभव नहीं है।

एक समर्पित करियर का समापन

डॉ. चतुर्वेदी को उनकी मिलनसारिता और सटीक उपचार के लिए जाना जाता है। विदाई समारोह के दौरान मौजूद साथियों ने उनके साथ बिताए पलों को याद किया और बताया कि कैसे मुश्किल समय में भी डॉ. साहब ने शांत रहकर मरीजों की सेवा की।

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