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पूरे मैदान में जीवंत हुई रामकथा; मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने की आयोजन की सराहना
विदिशा | 06 फरवरी, 2026
विदिशा की सदियों पुरानी और विश्वप्रसिद्ध श्रीरामलीला इन दिनों अपने पूरे वैभव पर है। यहाँ की अनूठी ‘चलित परंपरा’ और आधुनिक तकनीक के संगम ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया है। गुरुवार की रात अहिरावण वध के बाद नारांतक वध की लीला का भव्य मंचन हुआ, जिसमें धर्म और अधर्म के युद्ध को जीवंत रूप में दिखाया गया।
मैदान ही बना ‘युद्धभूमि’: क्यों खास है विदिशा की रामलीला?
देश के अन्य हिस्सों से अलग, विदिशा की रामलीला किसी लकड़ी के छोटे मंच तक सीमित नहीं है।
- चलित मंचन: पूरी रामकथा विशाल मैदान में अलग-अलग स्थानों पर घूम-घूमकर प्रस्तुत की जाती है।
- विशाल जनसमूह: इस विशिष्ट शैली के कारण विदिशा ही नहीं, बल्कि रायसेन, भोपाल और गुना जैसे आसपास के जिलों से भी हजारों लोग यहाँ पहुँच रहे हैं।

⚔️ गुरु भाइयों के बीच भीषण संग्राम
लीला के दौरान दिखाया गया कि जब रावण की सेना बिखरने लगी, तब अजय योद्धा नारांतक युद्ध में उतरा।
- दिलचस्प मुकाबला: नारांतक और सुग्रीव पुत्र दधिवल दोनों के गुरु शुक्राचार्य थे।
- वध का दृश्य: वरदान के कारण जब हनुमान जी भी उसे परास्त नहीं कर सके, तब दधिवल ने मोर्चा संभाला और भीषण युद्ध के बाद नारांतक का वध कर वानर सेना को भयमुक्त किया।
बिग ब्रेकिंग: आज होगा ‘रावण दहन’
आज की रात विदिशा के लिए बेहद खास है। रामलीला मैदान में दशानन (रावण) के विशाल पुतले का दहन किया जाएगा।
- आतिशबाजी: पुतला दहन के साथ ही डिजिटल आतिशबाजी का भव्य प्रदर्शन आकर्षण का केंद्र रहेगा।
- अतिथियों का आगमन: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने भी आयोजन में शिरकत की और इसे भारतीय संस्कृति को सहेजने वाला एक अनुपम उदाहरण बताया।




