शताब्दी वर्ष: भोपाल में डॉ. मोहन भागवत का युवा संवाद; बोले- “दुनिया सत्य नहीं, शक्ति की भाषा सुनती है”

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Drnewsindia

भोपाल | राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत दो दिवसीय प्रवास पर भोपाल पहुंचे हैं। शुक्रवार को कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित ‘युवा संवाद’ में उन्होंने राष्ट्र निर्माण और विकसित भारत में संघ की भूमिका पर बेबाकी से विचार रखे।

⚡ शक्ति ही सत्य की रक्षक: सरसंघचालक के संबोधन के मुख्य अंश

ग्वालियर के युवा सतेंद्र दुबे द्वारा “विकसित भारत में संघ की भूमिका” पर पूछे गए सवाल के जवाब में डॉ. भागवत ने शक्ति और सामर्थ्य पर जोर दिया:

  • विश्व और शक्ति: डॉ. भागवत ने कहा, “विश्व सत्य नहीं सुनता, विश्व शक्ति सुनता है। जिनमें शक्ति है, दुनिया उनकी बात सुनती है। अगर आपकी बात सत्य है लेकिन आप दुर्बल हैं, तो कोई नहीं सुनेगा।”
  • तीन प्रकार की शक्ति: उन्होंने कहा कि हमें शरीर, मन और बुद्धि की सबलता के साथ-साथ शील और युक्ति की शक्ति भी चाहिए।
  • भारत का उत्तरदायित्व: जब भारत परम वैभव संपन्न और शक्तिशाली बनता है, तो वह विश्व को रास्ता दिखाता है। संघ का कार्य व्यक्ति निर्माण के जरिए इसी शक्ति को संगठित करना है।

भोपाल प्रवास: 2 दिनों में 4 बड़े कार्यक्रम

डॉ. भागवत का यह प्रवास समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने के लिए तैयार किया गया है:

कार्यक्रमसमय/दिनप्रमुख विषय
युवा संवादशुक्रवार सुबह31 जिलों के प्रतिभावान युवाओं से संवाद
प्रमुखजन गोष्ठीशुक्रवार शाम 5:30समाज के प्रभावशाली व्यक्तित्वों से विमर्श
सामाजिक सद्भाव3 जनवरी, सुबह 9:30सामाजिक एकता और समरसता पर बैठक
शक्ति संवाद3 जनवरी, शाम 5:00राष्ट्र निर्माण में मातृशक्ति की भूमिका

क्यों खास है यह प्रवास?

  • शताब्दी यात्रा: संघ के 100 वर्ष पूरे होने पर समाज में बढ़ी जिज्ञासाओं का समाधान।
  • व्यक्ति निर्माण: युवाओं को शिक्षा, सेवा और नवाचार के साथ सामाजिक मूल्यों से जोड़ना।
  • सामाजिक समरसता: विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों के साथ एकता का मंत्र साझा करना।

विशेष: इस कार्यक्रम में मध्यभारत प्रांत के उन युवाओं को आमंत्रित किया गया है जिन्होंने शिक्षा, सामाजिक कार्य और नवाचार में विशिष्ट पहचान बनाई है।


शताब्दी वर्ष का संदेश

संघ के शताब्दी वर्ष के दौरान डॉ. भागवत का भोपाल विभाग का यह प्रवास वैचारिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसका उद्देश्य न केवल संघ के बारे में भ्रांतियों को दूर करना है, बल्कि यह भी स्पष्ट करना है कि एक जागरूक नागरिक राष्ट्र निर्माण में कैसे योगदान दे सकता है।

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